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वायरल बुखार में ये 7 चीजें खाएं, जल्दी मिलेगी राहत

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वायरल बुखार में ये 7 चीजें खाएं, जल्दी मिलेगी राहत

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Medically Reviewed ByDr. Mayanka Lodha Seth
Written By
Kirti Saxena
Last Edited ByKirti SaxenaSep 18, 2026
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वायरल बुखार के दौरान शरीर का तापमान बढ़ने से ऊर्जा की खपत तेज हो जाती है, भूख कम लगती है और पसीने के कारण शरीर से पानी व इलेक्ट्रोलाइट्स निकल जाते हैं। ऐसे में सही खान-पान दवा का विकल्प तो नहीं है, लेकिन यह शरीर को जल्दी ठीक होने में मदद जरूर कर सकता है। 

 

शोध के अनुसार शरीर के तापमान में हर 1°C की बढ़ोतरी पर बेसल मेटाबॉलिक रेट लगभग 10–13% तक बढ़ जाता है, यानी बुखार में शरीर को सामान्य से ज्यादा ऊर्जा, प्रोटीन और तरल पदार्थों की जरूरत होती है। इस लेख में जानिए वायरल बुखार में कौन सी 7 चीजें खानी चाहिए, क्या नहीं खाना चाहिए और कब तुरंत डॉक्टर के पास जाना जरूरी है।

 

वायरल बुखार में डाइट क्यों मायने रखती है

बुखार के दौरान शरीर में तीन बड़े बदलाव होते हैं:

  • ऊर्जा की मांग बढ़ना: तापमान बढ़ने से चयापचय (metabolism) तेज होता है और शरीर सामान्य से अधिक कैलोरी खर्च करता है।
  • प्रोटीन का टूटना बढ़ना: संक्रमण के दौरान मांसपेशियों के प्रोटीन का टूटना तेज हो जाता है, जिससे कमजोरी महसूस होती है। इसी वजह से रिकवरी में पर्याप्त प्रोटीन जरूरी हो जाता है।
  • पानी और इलेक्ट्रोलाइट की कमी: पसीना, तेज सांस और कभी-कभी उल्टी-दस्त के कारण शरीर से तरल पदार्थ निकल जाते हैं, जिससे डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ता है।

इसलिए वायरल बुखार में ऐसा आहार चाहिए जो हल्का और आसानी से पचने वाला हो, लेकिन साथ ही पर्याप्त ऊर्जा, प्रोटीन और तरल भी दे।

 

वायरल बुखार में खाने योग्य 7 सबसे फायदेमंद चीजें

वायरल बुखार में खाने योग्य 7 सबसे फायदेमंद चीजें

1. पर्याप्त तरल पदार्थ: पानी, ORS और नारियल पानी

यह सबसे जरूरी और सबसे ज्यादा प्रमाणित उपाय है। बुखार में डिहाइड्रेशन रोकना इलाज का बुनियादी हिस्सा माना जाता है, और स्वास्थ्य संस्थाएं बुखार के दौरान तरल पदार्थों का सेवन बढ़ाने की सलाह देती हैं।

क्या लें: सादा पानी, ORS घोल, नारियल पानी, नींबू पानी, पतली छाछ, हल्का शोरबा।

खास बात: अगर बुखार के साथ उल्टी या दस्त भी हो रही है, तो सिर्फ पानी काफी नहीं है। ऐसे में ORS (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन) सबसे उपयुक्त है, क्योंकि यह सोडियम और पोटैशियम जैसे जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स की भरपाई करता है। ORS को हमेशा पैकेट पर दिए गए निर्देश के अनुसार साफ पानी में घोलें | ज्यादा गाढ़ा घोल नुकसानदायक हो सकता है।

दिन भर में: थोड़ी-थोड़ी मात्रा में बार-बार पिएं, एक बार में बहुत ज्यादा नहीं।

 

2. खिचड़ी, दलिया और चावल का माड़: आसानी से पचने वाली ऊर्जा

बुखार में पाचन तंत्र धीमा हो जाता है और भारी भोजन से बेचैनी बढ़ सकती है। ऐसे में नरम पकाए गए अनाज, जैसे मूंग दाल की खिचड़ी, दलिया या चावल का माड़, शरीर को बिना पाचन पर बोझ डाले तुरंत ऊर्जा देते हैं।

क्यों फायदेमंद: ये कार्बोहाइड्रेट का सरल स्रोत हैं, जो कमजोरी कम करने में मदद करते हैं। मूंग दाल मिलाने से इसमें हल्का प्रोटीन भी जुड़ जाता है।

टिप: खिचड़ी में ज्यादा तेल, घी या मिर्च-मसाला न डालें। हल्की हींग और जीरा पाचन के लिए बेहतर रहता है।

 

3. सूप: सब्जियों का सूप

वायरल बुखार के दौरान गर्म सब्जियों का सूप हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन हो सकता है। यह शरीर को तरल पदार्थ के साथ सब्जियों से मिलने वाले जरूरी पोषक तत्व प्रदान करने में मदद करता है। गर्म सूप गले की खराश और बंद नाक में भी आराम दे सकता है।

क्यों फायदेमंद: सब्जियों का सूप शरीर में तरल पदार्थ की मात्रा बनाए रखने के साथ पोषण देने में मदद करता है। इसे भूख कम लगने पर भी आसानी से लिया जा सकता है।

बेहतर विकल्प: टमाटर, गाजर, पालक, लौकी या मिक्स वेजिटेबल सूप।

 

4. विटामिन C से भरपूर फल: संतरा, मौसमी, आंवला, कीवी, अमरूद

विटामिन C पर हुए अध्ययनों में यह पाया गया है कि नियमित सेवन से सामान्य सर्दी-जुकाम की अवधि कुछ हद तक कम हो सकती है और लक्षणों की गंभीरता में औसतन कमी देखी गई है। हालांकि यह स्पष्ट रहना जरूरी है कि विटामिन C बुखार का इलाज नहीं है, यह रिकवरी को सहारा देने वाला पोषक तत्व है।

क्या खाएं: संतरा, मौसमी, कीवी, अमरूद, आंवला और पपीता जैसे फल खा सकते हैं। फलों को जूस की बजाय सीधे खाना बेहतर है, क्योंकि इससे शरीर को फाइबर भी मिलता है।

सावधानी: अगर गला बहुत खराब हो या मुंह में छाले हों, तो बहुत खट्टे फल जलन बढ़ा सकते हैं। ऐसे में पपीता, केला या तरबूज बेहतर विकल्प हैं।

 

5. दही और छाछ: पाचन और आराम के लिए

दही में मौजूद प्रोबायोटिक बैक्टीरिया आंतों की सेहत को सहारा देते हैं, खासकर तब जब बुखार के साथ एंटीबायोटिक ली जा रही हो या पेट खराब हो। छाछ हल्की, ठंडी और हाइड्रेटिंग होती है, जो बुखार में आसानी से पच जाती है।

ध्यान रखें: दही और छाछ अधिकतर लोगों के लिए सुरक्षित हैं। यह मान्यता कि "बुखार में दूध-दही बिल्कुल नहीं खाना चाहिए" वैज्ञानिक रूप से सिद्ध नहीं है। हां, अगर दूध या दही खाने के बाद पेट भारी लगे, गैस या दस्त बढ़े, तो कुछ दिन के लिए इसे कम करें।

 

6. प्रोटीन युक्त हल्का आहार: दाल, अंडा, पनीर

संक्रमण के दौरान शरीर में प्रोटीन का टूटना तेज होता है, इसलिए पर्याप्त प्रोटीन लेना कमजोरी रोकने और ऊतकों की मरम्मत के लिए जरूरी है। अंडे प्रोटीन के साथ-साथ जिंक भी देते हैं, और जिंक की भूमिका प्रतिरक्षा तंत्र के सामान्य कामकाज में महत्वपूर्ण मानी जाती है। कुछ अध्ययनों में जिंक को सामान्य सर्दी की अवधि कम करने से जोड़ा गया है।

क्या खाएं: उबला अंडा, मूंग या मसूर की पतली दाल, पनीर।

कैसे खाएं: एक बार में भारी थाली के बजाय दिन में 4–5 बार छोटी-छोटी मात्रा में खाना बेहतर रहता है, क्योंकि बुखार में भूख कम लगती है।

 

7. अदरक, तुलसी और शहद वाली हर्बल चाय

गर्म पेय गले की खराश और बंद नाक में आराम देते हैं। अदरक में सूजन-रोधी गुण पाए गए हैं और यह मतली में भी राहत दे सकता है। शहद को लेकर एक कोक्रेन समीक्षा में पाया गया कि यह खांसी की परेशानी और नींद में होने वाली बाधा को कम करने में सहायक हो सकता है, विशेषकर बच्चों में।

बहुत जरूरी सावधानी: एक साल से छोटे शिशुओं को शहद कभी न दें, क्योंकि इससे इन्फैंट बॉटुलिज़्म नामक गंभीर स्थिति का खतरा होता है।

टिप: हर्बल चाय में चीनी की मात्रा कम रखें और बहुत ज्यादा कैफीन वाली चाय-कॉफी से बचें, क्योंकि ये डिहाइड्रेशन बढ़ा सकती हैं।

Read Also: बुखार उतारने के घरेलू उपाय: तुरंत राहत के आसान तरीके जानें

 

वायरल बुखार में क्या नहीं खाना चाहिए

  • तला-भुना और अधिक तेल वाला खाना: समोसा, पूरी, पराठा, पकौड़े पचने में भारी होते हैं और बेचैनी बढ़ा सकते हैं।
  • बहुत तीखा और मसालेदार भोजन: गले की जलन और पेट की परेशानी बढ़ा सकता है।
  • अत्यधिक मीठे पेय और सोडा: ये पोषण नहीं देते और दस्त की स्थिति में समस्या बढ़ा सकते हैं।
  • शराब और ज्यादा कैफीन: दोनों शरीर में पानी की कमी बढ़ा सकते हैं और दवाओं के असर को प्रभावित कर सकते हैं।
  • कच्चा या बाहर का खुला खाना: संक्रमण के दौरान कमजोर शरीर में फूड पॉइजनिंग का जोखिम बढ़ जाता है।
  • बहुत सख्त या कुरकुरे खाद्य पदार्थ: गले में खराश होने पर ये जलन बढ़ा सकते हैं।

 

वायरल बुखार में देखभाल के कुछ जरूरी नियम

  • आराम सबसे जरूरी है: शरीर को संक्रमण से लड़ने के लिए ऊर्जा चाहिए, इसलिए पर्याप्त नींद लें।
  • एंटीबायोटिक अपने आप न लें: वायरल संक्रमण पर एंटीबायोटिक काम नहीं करती। इसे बिना डॉक्टर की सलाह के लेना नुकसानदायक है और एंटीबायोटिक प्रतिरोध बढ़ाता है।
  • बुखार की दवा डॉक्टर की सलाह से: खुद से कई दवाएं मिलाकर न लें, खासकर अगर लिवर, किडनी या पेट से जुड़ी समस्या हो।
  • भूख न लगे तो जबरदस्ती न करें: ऐसे में तरल पदार्थों पर ध्यान दें और थोड़ी-थोड़ी मात्रा में बार-बार कुछ हल्का लेते रहें।
  • डेंगू/मलेरिया वाले क्षेत्रों में सतर्कता: भारत में मानसून और उसके बाद के महीनों में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया आम हैं। बुखार 2–3 दिन से ज्यादा रहने पर जांच जरूरी है।

 

वायरल बुखार में कौन से टेस्ट कराने चाहिए?

वायरल बुखार में डॉक्टर लक्षणों और बुखार की अवधि के आधार पर अलग-अलग जांच की सलाह दे सकते हैं:

  • CBC: सफेद रक्त कोशिकाओं और प्लेटलेट्स की स्थिति जानने में मदद करती है।
  • Dengue Test: तेज बुखार के साथ शरीर में दर्द, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द या प्लेटलेट्स कम होने जैसे लक्षणों में डॉक्टर इसकी सलाह दे सकते हैं।
  • Malaria Test: बुखार के साथ ठंड लगना, कंपकंपी या पसीना आने पर मलेरिया की जांच की जरूरत हो सकती है।
  • Typhoid Test: लंबे समय से बुखार रहने और टाइफाइड का संदेह होने पर डॉक्टर संबंधित जांच करा सकते हैं।

हर वायरल बुखार में ये सभी टेस्ट जरूरी नहीं होते। सही जांच का चुनाव आपके लक्षणों और डॉक्टर की सलाह के आधार पर किया जाता है।

 

कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें

इन लक्षणों में देर न करें और तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें:

  • बुखार 3 दिन से अधिक बना रहे या बार-बार 103°F (39.4°C) से ऊपर जाए
  • लगातार उल्टी होना या कुछ भी पेट में न टिकना
  • तेज पेट दर्द, खासकर पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में
  • नाक, मसूड़ों से खून आना, त्वचा पर लाल चकत्ते या दाने
  • सांस लेने में दिक्कत, सीने में दर्द
  • बहुत कम पेशाब आना, मुंह सूखना, चक्कर आना (डिहाइड्रेशन के संकेत)
  • अत्यधिक सुस्ती, भ्रम की स्थिति, बेहोशी या दौरे
  • बच्चों में लगातार रोना, दूध/पानी न पीना, सुस्ती या शरीर ठंडा पड़ना
  • 3 महीने से छोटे शिशु में किसी भी तरह का बुखार

गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, छोटे बच्चों और डायबिटीज, किडनी, हृदय या प्रतिरक्षा से जुड़ी बीमारियों वाले लोगों में बुखार को हल्के में नहीं लेना चाहिए | इन्हें जल्दी डॉक्टर से दिखाना चाहिए।

 

निष्कर्ष

वायरल बुखार में सही खान-पान संक्रमण को खत्म नहीं करता, लेकिन यह शरीर को लड़ने की ताकत देता है, डिहाइड्रेशन से बचाता है और रिकवरी को आसान बनाता है। सबसे जरूरी है पर्याप्त तरल पदार्थ लेना, हल्का और पचने में आसान भोजन खाना, पर्याप्त प्रोटीन शामिल करना और भरपूर आराम करना। 

साथ ही चेतावनी संकेतों पर नजर रखना उतना ही जरूरी है, क्योंकि हर बुखार सामान्य वायरल नहीं होता, डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड या अन्य संक्रमण भी इसी तरह शुरू हो सकते हैं। लक्षण गंभीर हों या 3 दिन से ज्यादा बने रहें, तो जांच और डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

वायरल बुखार कितने दिन में ठीक होता है? 

अधिकतर सामान्य वायरल बुखार 3 से 7 दिन में अपने आप ठीक हो जाता है। कमजोरी कुछ दिन और रह सकती है। अगर बुखार एक हफ्ते से ज्यादा चले, तो जांच जरूरी है।

क्या वायरल बुखार में दूध पीना चाहिए? 

अधिकतर लोगों के लिए दूध सुरक्षित है और यह प्रोटीन का अच्छा स्रोत है। लेकिन अगर दूध पीने के बाद पेट भारी लगे या दस्त हो, तो इसकी जगह दही, छाछ या दाल का पानी लें।

वायरल बुखार में कौन सा फल सबसे अच्छा है? 

पपीता, केला, संतरा, मौसमी, अमरूद और तरबूज अच्छे विकल्प हैं। ये हल्के होते हैं, पानी और विटामिन देते हैं। बहुत खट्टे फल गले में खराश होने पर असहज लग सकते हैं।

क्या वायरल बुखार में नहाना चाहिए? 

हां, सामान्य या हल्के गुनगुने पानी से नहाना सुरक्षित है और इससे आराम भी मिलता है। बहुत ठंडे पानी या बर्फ से स्नान न करें, क्योंकि इससे कंपकंपी बढ़कर शरीर का तापमान और ऊपर जा सकता है।

वायरल बुखार में कितनी मात्रा में पानी पीना चाहिए? 

सामान्य दिनों की तुलना में अधिक तरल पदार्थ लेना चाहिए। एक आसान संकेतक है पेशाब का रंग हल्का पीला रंग बताता है कि शरीर में पानी पर्याप्त है, जबकि गाढ़ा पीला रंग पानी की कमी का संकेत है।

क्या बुखार में भूख न लगना सामान्य है? 

हां, बुखार में भूख कम होना सामान्य है। ऐसे में जबरदस्ती भारी खाना खाने के बजाय तरल पदार्थ और थोड़ी-थोड़ी मात्रा में हल्का भोजन लेते रहें। लेकिन अगर 24 घंटे से अधिक समय तक कुछ भी न खा-पी पा रहे हों, तो डॉक्टर से मिलें।

 

संदर्भ (References)

  1. Vitamin C reduces the severity of common colds: a meta-analysis
  2. The Common Cold and Complementary Health Approaches: What the Science Says. NCCIH, National Institutes of Health
  3. Dietary Management for Fevers and Infections. BNS Institute
  4. Do You Burn More Calories When Sick? Medical Facts. Bolt Pharmacy

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