AFP Test in Hindi: एएफपी टेस्ट क्या होता है और क्यों है जरूरी


एएफपी ब्लड टेस्ट क्या होता हैं?
एएफपी को (अल्फा-फीटोप्रोटीन) भी कहा जाता है, जो की मनुष्य के शरीर में पाया जाने वाला एक विशेष प्रोटीन होता है। यह वयस्क या भ्रूण के लिवर में Synthesis Process द्वारा बनाया जाता है।
कोई व्यक्ति जो वयस्कों का हो ,तो उसके रक्त में एएफपी की मात्रा बहुत कम होती है, जिसकी वजह से उसकी उपस्थिति का आमतौर पर पता नहीं चल पाता है। एएफपी की मात्रा इस बात पर निर्भर करती है ,कि व्यक्ति को ट्यूमर की बीमारी हैं,और वहा किस स्टेज पर है। इसी प्रकार से, एएफपी एक ट्यूमर मार्कर के रूप में भी काम करता है।
एएफपी ब्लड टेस्ट क्यों किया जाता हैं?
डॉक्टर्स ए एफ पी टेस्ट आम बीमारी होने पर नही करते,जब किसी व्यक्ति को भूत ही गंभीर बीमारी हो तभी तो ए एफ पी टेस्ट के लिए मरीज को बोलते हैं ,जब कुछ विशेष परिस्थिति हो तभी एएफपी ब्लड टेस्टकरवाने की सलाह देते हैं, प्रेगनेंट महिलो की जांच खासकर 15 से 17 हफ्ते के बीच में की जाती हैं ,ताकि उन बच्चों को खोजने में आसानी रहे जो न्यूरल ट्यूमर से पीड़ित हो या फिर डाउन सिंड्रोम से जूंझ रहे हो , एएफपी ब्लड टेस्ट कुछ परिस्थितियां का पता लगने के लिए भी किया जाता हैं ,जैसे की :
- हेपेटाइटिस या पीलिया का इलाज ठीक से हो रहा है या नहीं।
- लीवर इन्फेक्शन टेस्ट का रिजल्ट असाधारण आने पर।
- पेशाब में ग्लूकोज का स्तर असामान्य आने पर।
- अंडकोष में गांठ का पता लगाने के लिए।
- पता लगाने के लिए कि कैंसर का इलाज ठीक से हो रहा है या नहीं।
एएफपी ब्लड टेस्ट क्यों जरूरी हैं ?
आमतौर पर डॉक्टर्स एएफपी ब्लड टेस्ट उन महिलाओं का करते हैं जो जिनके बच्चे होने वाले हो और उनके बच्चे होने में किसी प्रकार का कोई जोखिम आ रहा हो , ये एएफपी ब्लड टेस्ट आमतौर पर उन महिलाओं के लिए बहुत किया जाता है, जैसे की :
जो 35 साल या उससे अधिक उम्र होने पर गर्भधारण करती हैं, और प्रेगनेंसी के दौरान जो दर्द होता हैं, उसमे कुछ महिलाएं बिना डॉक्टर्स से बिना बात चीत करे प्रेगनेंसी के दौरान किसी प्रकार की कोई हानिकारक दावा ले लेती हैं,जो की होने वाले बच्चे के लिए बहुत ही हानिकारक होता हैं।
और ये जरूरी नहीं हैं ,की एएफपी ब्लड टेस्ट सिर्फ प्रेगनेंट महिलाओं का ही किया जाए, इस ब्लड टेस्ट को पुरष या महिला कोई भी करवा सकता हैं ,,ये उनका भी किया जाता हैं ,जिनको यकृत कैंसर हो ,या हेपोटेटिस हो।
एएफपी ब्लड टेस्ट किसी भी प्रकार का कैंसर का पता पहने के लिए भी किया जाता हैं जैसे की : पित नली का कैंसर , व्रशद कैंसर , आमाशय कैंसर और अन्याश्य कैंसर आदि का पता लगने के लिए भी किया जाता हैं। एएफपी ब्लड टेस्ट की मदद से निम्न समस्याओं का भी पता लगा सकते हैं जैसे की :
- बच्चों में मेटाबोलिक विकार।
- लिवर में ट्यूमर होना।
- शिशुओं या छोटे बच्चों को ट्यूमर।
- भ्रूण का शारीरिक विकास संबंधी दोष जैसे श्पीना बैफिड।
- भ्रूण में डाउन सिंड्रोम का पता लगना।
- भ्रूण में क्रोमोसोम संबंधी असामान्यताएं।
- केंद्रीय तंत्रिका तंत्र, पेट या अंदश्य में ट्यूमर।
एएफपी ब्लड टेस्ट से पहले
यदि आप शराब या किसी भी प्रकार का कोई भी ध्रुमपन करते हैं , तो भी डॉक्टर को इस बारे में बता दें। यदि किसी महिला को एएफपी टेस्ट करवाना हैं और वह गर्भवती हैं या पहले आपके जुड़वा बच्चे हुए हैं, तो इस बारे में भी डॉक्टर को पता होना बहुत ही जरूरी होता है। किसी प्रकार की बीमारी या संक्रमण आदि के बारे में भी डॉक्टर को बता देना चाहिए। हालांकि, डॉक्टर से अनुमति लिए बिना किसी दवा को लेना बंद न करें और न ही उसकी खुराक में कोई भी बदलाव करें।
एएफपी ब्लड टेस्ट के दौरान
एएफपी ब्लड टेस्ट के दौरान सबसे पहले तो डॉक्टर्स अपने नर्स से आपका ब्लड टेस्ट करने को कहते हैं,जो की सबसे पहले आपके हाथ की बांह के उस हिस्से को एंटिसेप्टिक से साफ करते हैं ,जहां पर सुई लगाकर रक्त का सैंपल लिए जा सके। बांह के ऊपरी हिस्से पर पट्टी बांध दी जाती है, ताकि नसों में रक्त का बहाव रुक जाए और नसें फुलने लग जाएं। नस में सुई लगाकर उचित मात्रा में रक्त का सैंपल निकाल लिया जाता है, और फिर उस ब्लड को किसी इंजेक्शन या शीशी में भर लिया जाता है। सैंपल को लैब में जांच के लिए भेज दिया जाता है, सुई लगने के दौरान हल्का दर्द या चुभन महसूस होना यह आम बात है, जो कुछ ही देर में ठीक भी हो जाती है।
कुछ लोगो को सुई वाले स्थान पर हल्का सा नील भी पड़ जाता है। हालांकि, यह भी कुछ दिन में ठीक भी हो जाता है।
यदि डॉक्टर को एएफपी ब्लड के परिणामों पर कुछ संदेह होता है, तो आपके पेशाब और एम्नियोटिक फ्लूइड में एएफपी की जांच करने पर विचार कर सकते हैं।
एएफपी ब्लड टेस्ट से क्या – क्या जोखिम हो सकते हैं?
एएफपी ब्लड टेस्ट एक सामान्य ब्लड टेस्ट प्रक्रिया होती है, जिससे कोई डरने की बात नहीं होती है। हालांकि, सैंपल के लिए रक्त निकालने की प्रक्रिया से कुछ परेशानियां महसूस हो सकती हैं, जिनमें कुछ इस प्रकार शामिल हैं -
- सुई वाली जगह पर कभी – कभी दर्द या चुभन महसूस होना कभी – कभी उस जगह पर सूजन भी आ जाती हैं ,
- जिस जगह पर सुई लगी,हैं ,उस जगह से ब्लड निकलना।
- त्वचा के नीचे ब्लड जमा हो जाना (नील पड़ना या हीमेटोमा)
- जिस जगह सुई लगी हैं,उस जगह पर उस छेद के आस पास बीमारी आ जाना जैसे की : इन्फेक्शन हो जाना ,नीला पद जाना , सूज जाना आदि (दुर्लभ मामलों मे)l
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1 Comments
Seema Gupta
Sep 23, 2024 at 8:14 AM.
AFP. 2.5
Myhealth Team
Sep 23, 2024 at 8:18 AM.
Hi Seema, AFP (Alpha-fetoprotein) level of 2.5 ng/mL is generally considered normal for most age groups. Elevated AFP levels can indicate liver issues, certain cancers, or pregnancy-related conditions, but a level of 2.5 is typically not a cause for concern. It’s best to consult your doctor for interpretation in the context of your overall health and any symptoms you may have.



