टॉन्सिल कैंसर के ये 7 लक्षण भूलकर भी न करें नजरअंदाज


गले में खराश या टॉन्सिल की सूजन बेहद आम समस्या है और ज्यादातर मामलों में यह सामान्य संक्रमण के कारण होती है, जो कुछ दिनों में अपने आप ठीक हो जाती है। लेकिन कुछ लक्षण ऐसे होते हैं जो लंबे समय तक बने रहें या लगातार बढ़ते जाएं, तो उन्हें नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।
टॉन्सिल कैंसर, जो ऑरोफैरिंजियल कैंसर (गले के मध्य हिस्से का कैंसर) का सबसे आम रूप है, अक्सर शुरुआती चरण में बहुत हल्के लक्षण दिखाता है। समय पर पहचान होने पर इसका इलाज काफी हद तक सफल होता है। इस लेख में जानिए टॉन्सिल कैंसर के 7 प्रमुख चेतावनी संकेत, इसके कारण, जोखिम कारक और कब डॉक्टर से मिलना जरूरी है।
गले में खराश, टॉन्सिल में सूजन या गर्दन में गांठ के अधिकतर मामले कैंसर नहीं होते, ये आमतौर पर वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण, टॉन्सिलाइटिस, एलर्जी या एसिड रिफ्लक्स के कारण होते हैं। टॉन्सिल कैंसर एक अपेक्षाकृत दुर्लभ बीमारी है।
लेकिन अंतर इस बात से पड़ता है कि लक्षण कितने समय तक बने रहते हैं और क्या वे एक तरफ ही हैं। संक्रमण के लक्षण आमतौर पर 1–2 हफ्ते में ठीक हो जाते हैं, जबकि कैंसर के लक्षण लगातार बने रहते हैं और धीरे-धीरे बढ़ते जाते हैं। इसीलिए नीचे दिए गए लक्षणों को समय-सीमा के साथ समझना जरूरी है।
टॉन्सिल कैंसर क्या है?
टॉन्सिल गले के पिछले हिस्से में दोनों तरफ मौजूद मांसल संरचनाएं हैं, जो प्रतिरक्षा तंत्र का हिस्सा होती हैं। जब टॉन्सिल की कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं और ट्यूमर बनाती हैं, तो इसे टॉन्सिल कैंसर कहा जाता है।
- यह ऑरोफैरिंजियल कैंसर का एक प्रमुख प्रकार है। ऑरोफैरिंक्स में टॉन्सिल के अलावा जीभ का पिछला हिस्सा, नरम तालु और गले की पिछली दीवार शामिल होती है।
- 95% से अधिक ऑरोफैरिंजियल कैंसर स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा होते हैं, जो गले की सतह को ढकने वाली कोशिकाओं से शुरू होते हैं। कुछ मामलों में कैंसर लिम्फ ऊतक से शुरू होकर लिम्फोमा का रूप ले सकता है।
- टॉन्सिल कैंसर पुरुषों में महिलाओं की तुलना में अधिक आम है।
टॉन्सिल कैंसर के 7 चेतावनी लक्षण

1. गले में लगातार खराश, जो ठीक ही न हो
सामान्य गले का संक्रमण आमतौर पर 7–10 दिनों में ठीक हो जाता है। लेकिन अगर गले में खराश या दर्द 3 हफ्ते से अधिक समय तक बना रहे, दवा लेने पर भी न जाए, और खासकर सिर्फ एक तरफ महसूस हो, तो इसकी जांच जरूरी है। "लगातार बना रहने वाला गले का दर्द" टॉन्सिल कैंसर के सबसे सामान्य लक्षणों में गिना जाता है।
2. गर्दन में गांठ जो हफ्तों तक बनी रहे
यह टॉन्सिल कैंसर का सबसे आम शुरुआती संकेत है। कई बार गले में कोई खास दर्द नहीं होता और मरीज सबसे पहले गर्दन में एक दर्द-रहित गांठ की शिकायत लेकर आता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि टॉन्सिल में लसिका (lymphatic) की आपूर्ति भरपूर होती है, जिससे कैंसर कोशिकाएं जल्दी गर्दन के लिम्फ नोड्स तक पहुंच जाती हैं।
कब जांच कराएं: अगर गर्दन में कोई गांठ 3 हफ्ते से ज्यादा बनी रहे, सख्त महसूस हो, बढ़ रही हो, या दबाने पर दर्द न हो, तो तुरंत ईएनटी विशेषज्ञ से मिलें। संक्रमण वाली गांठें आमतौर पर दर्द करती हैं और कुछ हफ्तों में अपने आप छोटी हो जाती हैं।
3. निगलने में दर्द या कठिनाई
खाना या पानी निगलते समय दर्द (odynophagia) या ऐसा लगना कि कुछ गले में अटका हुआ है (dysphagia), ये दोनों ही महत्वपूर्ण चेतावनी संकेत हैं। शुरुआत में यह सिर्फ ठोस खाने में महसूस हो सकता है, लेकिन जैसे-जैसे ट्यूमर बढ़ता है, तरल पदार्थ निगलना भी मुश्किल हो सकता है।
चिकित्सा की भाषा में निगलने में कठिनाई और निगलते समय दर्द को "रेड फ्लैग" लक्षणों में गिना जाता है, जिनकी जांच जरूरी मानी जाती है।
4. एक कान में लगातार दर्द (जबकि कान में कोई समस्या न हो)
यह लक्षण सबसे ज्यादा नजरअंदाज किया जाता है। टॉन्सिल और कान एक ही तंत्रिका (नर्व) मार्ग साझा करते हैं, इसलिए गले में मौजूद ट्यूमर का दर्द कान तक महसूस हो सकता है। इसे चिकित्सा भाषा में रेफर्ड ओटाल्जिया (referred otalgia) कहा जाता है।
संदेह कब करें: अगर एक ही कान में लगातार दर्द हो, लेकिन कान की जांच में कोई संक्रमण या समस्या न मिले, खासकर अगर साथ में गले की तकलीफ भी हो, तो यह गंभीरता से लेने वाला संकेत है।
5. टॉन्सिल का एक तरफ बढ़ना, उस पर घाव या रंग बदलना
दोनों टॉन्सिल का आकार सामान्यतः लगभग बराबर होता है। अगर एक टॉन्सिल दूसरे से स्पष्ट रूप से बड़ा हो जाए और यह अंतर बना रहे, तो इसकी जांच होनी चाहिए। कुछ मामलों में टॉन्सिल कैंसर बिना किसी लक्षण के केवल असमान टॉन्सिल के रूप में ही पकड़ में आता है।
इन बदलावों पर भी ध्यान दें:
- टॉन्सिल या गले में ऐसा घाव/अल्सर जो 2–3 हफ्ते में न भरे
- मुंह या जीभ पर सफेद धब्बा (ल्यूकोप्लाकिया) या लाल धब्बा (एरिथ्रोप्लाकिया) जो बना रहे
- टॉन्सिल की सतह का सख्त या ऊबड़-खाबड़ महसूस होना
6. थूक या लार में खून आना, और मुंह से लगातार दुर्गंध
थूकने पर खून के निशान दिखना, या खांसी में खून आना एक गंभीर संकेत है जिसे किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। साथ ही ट्यूमर वाले हिस्से में ऊतकों के क्षय के कारण मुंह से लगातार दुर्गंध आ सकती है, जो ब्रश करने या माउथवॉश से भी ठीक नहीं होती।
7. मुंह पूरा न खुल पाना, आवाज में बदलाव और बिना कारण वजन घटना
ये लक्षण बीमारी के बढ़ने या आसपास के ऊतकों को प्रभावित करने पर दिखाई दे सकते हैं:
- मुंह पूरा न खुल पाना (ट्रिस्मस): ट्यूमर के आसपास की मांसपेशियों के प्रभावित होने पर यह समस्या हो सकती है।
- आवाज में लगातार बदलाव या भारीपन: अगर आवाज में बदलाव 3 सप्ताह से अधिक समय तक बना रहे, तो डॉक्टर से जांच कराना चाहिए।
- जीभ हिलाने में कठिनाई: ट्यूमर आसपास के ऊतकों या नसों को प्रभावित करने पर जीभ की गति प्रभावित हो सकती है।
- बिना प्रयास के वजन कम होना: बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन कम होना कई कैंसर में चेतावनी संकेत हो सकता है।
यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि टॉन्सिल कैंसर शुरुआती चरण में कभी-कभी कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाता। इसलिए लगातार बने रहने वाले या असामान्य लक्षणों को नजरअंदाज न करें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से जांच कराएं।
टॉन्सिल कैंसर के मुख्य जोखिम कारक

1. एचपीवी (HPV) संक्रमण
पिछले कुछ दशकों में टॉन्सिल कैंसर के कारणों में बड़ा बदलाव आया है। अब इनमें से अधिकांश मामले ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV), विशेष रूप से HPV टाइप 16 से जुड़े पाए जा रहे हैं। यूरोप और उत्तरी अमेरिका में लगभग 70–80% ऑरोफैरिंजियल कैंसर HPV से संबंधित बताए गए हैं। यही वजह है कि अब यह कैंसर पहले की तुलना में कम उम्र के लोगों में भी देखा जा रहा है।
महत्वपूर्ण संदर्भ: भारत में स्थिति कुछ अलग है, यहां HPV से जुड़े मामलों का अनुपात पश्चिमी देशों की तुलना में कम है और तंबाकू व सुपारी से जुड़े मामले अधिक हैं। भारतीय अध्ययनों में HPV पॉजिटिविटी दर व्यापक रूप से भिन्न पाई गई है।
2. तंबाकू और धूम्रपान
बीड़ी, सिगरेट, गुटखा, खैनी, पान मसाला, तंबाकू के सभी रूप टॉन्सिल कैंसर का जोखिम बढ़ाते हैं। 10 पैक-ईयर से अधिक धूम्रपान के इतिहास को एक स्थापित जोखिम कारक माना गया है।
3. अत्यधिक शराब का सेवन
भारी मात्रा में शराब का सेवन टॉन्सिल कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकता है। धूम्रपान के साथ शराब का सेवन करने पर यह जोखिम और बढ़ सकता है।
4. सुपारी और पान का सेवन
सुपारी, पान और पान मसाला चबाने की आदत को एशियाई देशों में एक प्रमुख जोखिम कारक माना गया है। भारत में मुंह और गले के कैंसर का बड़ा हिस्सा तंबाकू, सुपारी और पान के सेवन से जुड़ा पाया गया है। अध्ययनों में यह भी सामने आया है कि सुपारी चबाने वाले मरीजों में उपचार के परिणाम अपेक्षाकृत कमजोर रहे।
5. अन्य कारक
- सिर या गर्दन के कैंसर का व्यक्तिगत इतिहास
- कमजोर प्रतिरक्षा तंत्र
- मुंह की खराब स्वच्छता और दांतों की खराब स्थिति
- बढ़ती उम्र (HPV-रहित मामलों में औसत आयु लगभग 61 वर्ष पाई गई है)
टॉन्सिल कैंसर की जांच कैसे होती है?
- शारीरिक परीक्षण: ईएनटी विशेषज्ञ या हेड-नेक सर्जन गले और गर्दन की जांच करते हैं, गांठों को हाथ से टटोलते हैं और छोटे शीशे या एंडोस्कोप से गले का निरीक्षण करते हैं।
- बायोप्सी: संदिग्ध ऊतक का छोटा नमूना लेकर उसकी माइक्रोस्कोप से जांच की जाती है। यही निदान की पुष्टि करने वाला निर्णायक कदम है।
- p16 / HPV परीक्षण: बायोप्सी नमूने में p16 प्रोटीन की जांच की जाती है, जो HPV से जुड़ाव का संकेत देती है। यह जांच इलाज की योजना और पूर्वानुमान दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।
- इमेजिंग जांच: सीटी स्कैन, एमआरआई या पीईटी-सीटी से ट्यूमर का आकार और फैलाव पता किया जाता है।
- गांठ से सुई द्वारा नमूना (FNAC): गर्दन की गांठ की प्रकृति जानने के लिए।
टॉन्सिल कैंसर का इलाज कैसे किया जाता है?
टॉन्सिल कैंसर का इलाज कैंसर के चरण, ट्यूमर के स्थान, HPV की स्थिति और मरीज की समग्र सेहत के आधार पर तय किया जाता है। प्रमुख उपचार विकल्पों में शामिल हैं:
- सर्जरी: कुछ मामलों में ट्रांसओरल रोबोटिक सर्जरी जैसी कम चीरा लगाने वाली तकनीकों का उपयोग किया जा सकता है।
- रेडिएशन थेरेपी: कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए विकिरण का उपयोग किया जाता है।
- कीमोथेरेपी: इसे कई बार रेडिएशन थेरेपी के साथ दिया जाता है।
- लक्षित चिकित्सा या इम्यूनोथेरेपी: कुछ उन्नत मामलों में इनका उपयोग किया जा सकता है।
बचाव के उपाय
- तंबाकू, गुटखा, सुपारी और पान मसाला पूरी तरह छोड़ें, यह सबसे प्रभावी कदम है
- शराब का सेवन सीमित करें या छोड़ें
- एचपीवी टीकाकरण, HPV वैक्सीन उन उच्च जोखिम वाले स्ट्रेन (जैसे टाइप 16) से बचाव में मदद करती है, जो इस कैंसर से जुड़े हैं। टीकाकरण की सही उम्र और पात्रता के लिए डॉक्टर से सलाह लें
- मुंह की स्वच्छता का ध्यान रखें और नियमित दंत जांच कराएं
- नियमित स्व-जांच, महीने में एक बार आईने के सामने मुंह, जीभ, गला और गर्दन की जांच करें
- लगातार लक्षणों को टालें नहीं, यह सबसे महत्वपूर्ण बचाव है
कब डॉक्टर से मिलना जरूरी है
इनमें से कोई भी लक्षण 3 हफ्ते से अधिक समय तक बना रहे तो ईएनटी विशेषज्ञ से जांच कराएं:
- गले में लगातार दर्द या खराश, खासकर एक तरफ
- गर्दन में गांठ जो कम न हो रही हो
- निगलने में लगातार कठिनाई या दर्द
- एक कान में लगातार दर्द, जबकि कान सामान्य हो
- मुंह या गले में न भरने वाला घाव, सफेद या लाल धब्बा
- थूक में खून आना
- आवाज में लगातार बदलाव
- मुंह पूरा न खुलना
- बिना कारण वजन घटना
तंबाकू या शराब का सेवन करने वालों को इन लक्षणों को और भी गंभीरता से लेना चाहिए, क्योंकि उनमें जोखिम पहले से अधिक होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
क्या टॉन्सिल की सूजन का मतलब कैंसर है?
नहीं। टॉन्सिल की सूजन का सबसे आम कारण संक्रमण होता है, जो कुछ दिनों में ठीक हो जाता है। चिंता तब होनी चाहिए जब सूजन सिर्फ एक तरफ हो, हफ्तों तक बनी रहे, या साथ में गर्दन की गांठ, कान का दर्द या वजन घटने जैसे लक्षण हों।
टॉन्सिल कैंसर किस उम्र में होता है?
पहले यह मुख्यतः 60 वर्ष के आसपास के पुरुषों में देखा जाता था, लेकिन HPV से जुड़े मामलों के बढ़ने के कारण अब यह कम उम्र के लोगों में भी पाया जा रहा है।
क्या टॉन्सिल कैंसर ठीक हो सकता है?
हां, विशेषकर जब शुरुआती चरण में पकड़ में आ जाए। HPV से जुड़े टॉन्सिल कैंसर में इलाज के परिणाम और उत्तरजीविता दर तुलनात्मक रूप से बेहतर पाई गई है।
क्या टॉन्सिल निकलवाने से टॉन्सिल कैंसर का खतरा खत्म हो जाता है?
टॉन्सिलेक्टॉमी के बाद टॉन्सिल में कैंसर का जोखिम काफी कम हो जाता है, लेकिन ऑरोफैरिंक्स के अन्य हिस्सों (जैसे जीभ का पिछला भाग) में कैंसर की संभावना बनी रहती है। इसलिए यह कैंसर से बचाव का उपाय नहीं माना जाता।
क्या एचपीवी वैक्सीन टॉन्सिल कैंसर से बचाती है?
HPV वैक्सीन उन उच्च-जोखिम वाले HPV स्ट्रेन से बचाव करती है जो इस कैंसर से जुड़े हैं, जिससे जोखिम कम होने की उम्मीद की जाती है। अपनी उम्र और स्थिति के अनुसार टीकाकरण की उपयुक्तता डॉक्टर से जरूर पूछें।
क्या गर्दन की हर गांठ कैंसर होती है?
नहीं। गर्दन की अधिकतर गांठें संक्रमण के कारण बढ़े हुए लिम्फ नोड्स होती हैं, जो दर्द करती हैं और कुछ हफ्तों में ठीक हो जाती हैं। लेकिन दर्द-रहित, सख्त और लगातार बढ़ती गांठ की जांच जरूरी है।
निष्कर्ष
टॉन्सिल कैंसर दुर्लभ है, लेकिन इसके शुरुआती लक्षण इतने सामान्य लगते हैं कि लोग महीनों तक इन्हें आम गले की तकलीफ समझकर टालते रहते हैं। सबसे अहम नियम यह है कोई भी गले, कान या गर्दन का लक्षण जो 3 हफ्ते से ज्यादा बना रहे, खासकर अगर वह सिर्फ एक तरफ हो, उसकी जांच करानी चाहिए।
अधिकतर मामलों में जांच से यही पता चलेगा कि कारण सामान्य है, और वह राहत भी अपने आप में मूल्यवान है। और यदि कुछ गंभीर निकलता भी है, तो जल्दी पहचान इलाज की सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है। तंबाकू, गुटखा, सुपारी और अत्यधिक शराब से दूरी बनाना इस कैंसर से बचाव का सबसे मजबूत कदम है।


