Dialysis Meaning in Hindi: डायलिसिस क्या होता है? पूरी जानकारी, प्रक्रिया और फायदे
Medically Reviewed By
Dr Divya Rohra
Written By Komal Daryani
on Mar 5, 2025
Last Edit Made By Komal Daryani
on Mar 5, 2025

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में किडनी (गुर्दे) से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। अनियमित खान-पान, मधुमेह (डायबिटीज), हाई ब्लड प्रेशर और खराब जीवनशैली के कारण किडनी फेलियर के मामलों में वृद्धि हो रही है। जब किसी व्यक्ति की किडनी ठीक से काम नहीं करती, तो शरीर में विषैले तत्व (टॉक्सिन्स), अतिरिक्त पानी और अपशिष्ट पदार्थ जमा होने लगते हैं, जो शरीर के लिए बेहद खतरनाक हो सकते हैं।
ऐसी स्थिति में डायलिसिस एक महत्वपूर्ण चिकित्सा प्रक्रिया है, जिससे शरीर को इन विषैले पदार्थों से मुक्त किया जाता है और जीवन को बचाया जाता है। इस ब्लॉग में हम डायलिसिस क्या है, यह कैसे काम करता है, इसके प्रकार, प्रक्रिया और इसके फायदे विस्तार से समझेंगे।
डायलिसिस क्या होता है?
डायलिसिस एक चिकित्सा पद्धति है, जो उन मरीजों के लिए उपयोग की जाती है जिनकी किडनी काम करना बंद कर चुकी होती है। यह शरीर से अतिरिक्त पानी, टॉक्सिन्स और अपशिष्ट पदार्थों को निकालने में मदद करता है। डायलिसिस तब किया जाता है जब किडनी की कार्यक्षमता 10-15% से कम हो जाती है और शरीर स्वयं विषैले तत्वों को बाहर नहीं निकाल पाता।
किडनी शरीर की प्राकृतिक फिल्टरिंग सिस्टम होती है, जो खून को साफ करती है और बेकार पदार्थों को मूत्र (यूरिन) के जरिए बाहर निकालती है। लेकिन जब यह कार्य बाधित होता है, तो डायलिसिस को एक कृत्रिम फिल्टर की तरह उपयोग किया जाता है।
डायलिसिस की जरूरत कब पड़ती है?
डॉक्टर तब डायलिसिस की सलाह देते हैं जब किडनी की कार्यक्षमता इतनी कम हो जाती है कि शरीर में विषैले पदार्थ जमा होने लगते हैं। आमतौर पर निम्नलिखित स्थितियों में डायलिसिस की जरूरत पड़ती है:
- किडनी फेलियर (Kidney Failure) – जब किडनी 10-15% से कम काम करने लगती है।
- क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) – धीरे-धीरे किडनी खराब होने की स्थिति।
- एक्यूट किडनी फेलियर – अचानक किडनी का काम करना बंद कर देना।
- डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर – ये दोनों समस्याएं किडनी की बीमारी के मुख्य कारण होते हैं।
- अत्यधिक पानी और टॉक्सिन्स का जमाव – शरीर में यूरिया, क्रिएटिनिन, और अन्य विषैले तत्व बढ़ने से।
अगर समय पर डायलिसिस न कराया जाए, तो शरीर में पानी की अधिकता, सूजन, सांस लेने में दिक्कत और हृदय संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
डायलिसिस के प्रकार
डायलिसिस मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है:
1. हीमोडायलिसिस (Hemodialysis)
हीमोडायलिसिस सबसे आम प्रकार की डायलिसिस है, जिसमें एक विशेष मशीन और कृत्रिम फिल्टर (डायलाइज़र) का उपयोग किया जाता है।
प्रक्रिया:
- मरीज के शरीर से रक्त को एक विशेष ट्यूब के माध्यम से बाहर निकाला जाता है।
- डायलाइज़र (Artificial Kidney) रक्त से टॉक्सिन्स और अतिरिक्त पानी को फ़िल्टर करता है।
- साफ किया गया रक्त वापस मरीज के शरीर में पहुंचा दिया जाता है।
समय और आवृत्ति:
- सप्ताह में 3 बार, प्रत्येक सत्र 4-5 घंटे का होता है।
- इसे अस्पताल, क्लिनिक या घर पर भी किया जा सकता है।
फायदे:
- जल्दी और प्रभावी तरीके से खून साफ करता है।
- मरीज को एक बेहतर जीवनशैली जीने में मदद करता है।
हानियां:
- बार-बार क्लिनिक जाना पड़ता है।
- उपचार के दौरान कमजोरी, मांसपेशियों में ऐंठन और ब्लड प्रेशर कम होने की समस्या हो सकती है।
2. पेरिटोनियल डायलिसिस (Peritoneal Dialysis)
इस प्रक्रिया में शरीर के अंदर ही रक्त शुद्ध किया जाता है, बिना किसी मशीन के।
प्रक्रिया:
- एक कैथेटर (छोटी नली) को पेट की गुहा (Peritoneal Cavity) में डाला जाता है।
- एक विशेष डायलिसेट तरल पदार्थ इस कैथेटर के माध्यम से अंदर डाला जाता है।
- यह तरल पदार्थ शरीर से अपशिष्ट और अतिरिक्त पानी को सोखकर बाहर निकालता है।
समय और आवृत्ति:
- यह रोजाना किया जाता है।
- इसे मरीज खुद भी घर पर कर सकता है।
फायदे:
- हीमोडायलिसिस की तुलना में ज्यादा आरामदायक।
- मरीज इसे घर पर ही कर सकता है।
हानियां:
- इंफेक्शन का खतरा अधिक होता है।
- यह हर मरीज के लिए उपयुक्त नहीं होता।
डायलिसिस के फायदे
डायलिसिस एक जीवन रक्षक प्रक्रिया है और इसके कई महत्वपूर्ण फायदे होते हैं:
- शरीर से विषैले पदार्थों को निकालकर रोगी को स्वस्थ बनाता है।
- किडनी फेलियर के बावजूद जीवन को बढ़ाने में मदद करता है।
- ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने और शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखने में सहायक।
- शरीर में अतिरिक्त पानी को बाहर निकालकर सूजन और सांस की दिक्कत को कम करता है।
- लंबे समय तक किडनी ट्रांसप्लांट का इंतजार कर रहे मरीजों के लिए एक विकल्प।
डायलिसिस से पहले और बाद में ध्यान देने योग्य बातें
डायलिसिस करवाने वाले मरीजों को कुछ विशेष सावधानियां बरतनी चाहिए:
डायलिसिस से पहले:
- डाइट में कम नमक, कम पोटैशियम और कम फॉस्फोरस वाले खाद्य पदार्थ लें।
- पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं लेकिन अधिक मात्रा से बचें।
- डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवा न लें।
डायलिसिस के बाद:
- प्रोटीन युक्त आहार जैसे अंडा, मछली, चिकन और दालों का सेवन करें।
- अत्यधिक थकान से बचें और पर्याप्त आराम करें।
- डायलिसिस साइट (जहां कैथेटर लगा हो) को साफ और संक्रमण मुक्त रखें।
डायलिसिस और किडनी ट्रांसप्लांट: क्या बेहतर है?
कुछ मरीजों के लिए किडनी ट्रांसप्लांट एक बेहतर विकल्प हो सकता है, लेकिन यह हमेशा संभव नहीं होता।
तुलना | डायलिसिस | किडनी ट्रांसप्लांट |
प्रक्रिया | नियमित रूप से की जाती है | एक बार की प्रक्रिया |
जीवनशैली | सीमित, क्लिनिक विजिट जरूरी | सामान्य जीवन संभव |
खर्च | बार-बार होने के कारण महंगा | एक बार का खर्च ज्यादा, लेकिन दीर्घकालिक सस्ता |
सफलता दर | इलाज का एक विकल्प | अधिक सफल और स्थायी समाधान |
अगर डोनर किडनी उपलब्ध हो और मरीज स्वस्थ हो, तो किडनी ट्रांसप्लांट अधिक फायदेमंद हो सकता है।
निष्कर्ष
डायलिसिस उन मरीजों के लिए जीवन रक्षक तकनीक है जिनकी किडनी काम करना बंद कर चुकी है। यह शरीर को विषैले तत्वों से मुक्त करके जीवन को लंबा और स्वस्थ बनाने में मदद करता है। हालांकि, सही आहार, नियमित जांच और डॉक्टर की सलाह से मरीज अपने जीवन की गुणवत्ता में सुधार कर सकते हैं।
अगर आपको या आपके परिवार में किसी को किडनी से जुड़ी समस्या है, तो डॉक्टर से सलाह लें और सही समय पर उपचार शुरू करें। सही देखभाल से जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है!