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भारत में थायराइड रोग : सबसे ज्यादा थायराइड की समस्या वाले शीर्ष 3 राज्य - MyHealth

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भारत में थायराइड रोग : सबसे ज्यादा थायराइड की समस्या वाले शीर्ष 3 राज्य

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Medically Reviewed ByDr. Ragiinii Sharma
Written By
Prekshi Garg
Last Edited ByPrekshi GargJan 8, 2025
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थायराइड (thyroid) मानव शरीर में एक अंतः स्रावी ग्रंथि (Endocrine Gland) है, जो गर्दन के निचले पृष्ठीय भाग (inferior dorsal part ) में स्थित है। थायराइड ग्रंथि (thyroid gland) का कार्य थायराइड हार्मोन (thyroid hormones) का स्राव (secretion) करना है जो मानव शरीर में समस्थिति (homeostasis) को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

थायराइड (thyroid) विभिन्न हार्मोन जैसे थायराइड उत्तेजक हार्मोन (टीएसएच) (Thyroid stimulating hormones, i.e., TSH), थायरोक्सिन (टी -4) (Thyroxine i.e.,T4), और ट्राईआयोडोथायरोनिन (टी -3) (triiodothyronine, i.e., T3) का उत्पादन करता है। TSH, T3 और T4 के स्तर को थायराइड ग्रंथि (thyroid gland) के कार्य का परीक्षण करने के लिए मापा जाता है।

उपलब्ध सांख्यिकीय आंकड़ों (standard data) के अनुसार, थायराइड रोग (thyroid disease) दुनिया भर में सबसे आम अंतःस्रावी विकार (common Endocrine disorders) हैं। ऐसा अनुमान है कि भारत में लगभग 42 लाख लोग थायराइड (thyroid) संबंधी समस्याओं से पीड़ित हैं।

इसमें सबसे व्यापक रूप से ज्ञात थायराइड रोग (thyroid disease) हैं हाइपोथायरायडिज्म (Hypothyroidism), हाइपरथायरायडिज्म (Hyperthyroidism), गोइटर (Goiter) / आयोडीन की कमी से होने वाले बीमारी और हाशिमोटो थायरॉयडिटिस (Hashimoto's thyroiditis)। थायराइड रोगों (thyroid disorders) का इलाज करना आसान है। लेकिन थायराइड (thyroids) से संबंधित समस्याओं के लिए प्रारंभिक निदान और उचित उपचार महत्वपूर्ण है।

केरल में थायराइड रोग की व्यापकता (Prevalence of thyroid disease in Kerala)

केरल भारत के दक्षिणी भाग में स्थित एक राज्य है। यह भौगोलिक रूप (geographically) से दो भागों में विभाजित है, तटीय क्षेत्र (coastal resign) और पहाड़ी क्षेत्र (hilly region)। पहाड़ी क्षेत्र (hilly region), आयोडीन की कमी के कारण थायराइड सम्बंधित समस्याओं (thyroids related issues) के मामलों की रिपोर्ट करने के लिए जाना जाता है।

अलग अलग अध्ययनों से पता चला है कि तटीय क्षेत्रों में (costal region) घेंघा (Goiter) के अधिक मामलों की रिपोर्ट की जाती है। इसलिए, भारत के इस हिस्से में सार्वभौमिक आयोडीनीकरण कार्यक्रम (universal iodization program) की असफलता को समझने के लिए गहन विश्लेषण की आवश्यकता है।

जम्मू और कश्मीर में थायराइड रोग की व्यापकता (Prevalence of thyroid disease in Jammu and Kashmir)

भारत में स्थित राज्यों में थायराइड सम्बंधित रोगों (thyroid related issues) के अधिक मामले सामने आए हैं। इसका कारण समुद्री भोजन (sea food) का कम सेवन है जो आयोडीन से भरपूर होता है। अंतर्देशीय राज्यों (inland states) में सरकार ने लगभग 30 वर्षों तक सार्वभौमिक नमक आयोडीनीकरण (universal salt iodization) किया फिर भी हिमालयी क्षेत्र जैसे की जम्मू और कश्मीर में हाइपोथायरायडिज्म (hypothyroidism) का प्रभाव कम नहीं हो रहा है।

दिल्ली में थायराइड रोग की व्यापकता (Prevalence of thyroid disease in Delhi)

भारत की राजधानी दिल्ली, भारत के उप-हिमालयी मैदानों में स्थित है। यह क्षेत्र मिट्टी और सब्जियों में आयोडीन की कमी के लिए जाना जाता है। सार्वभौमिक आयोडीनीकरण कार्यक्रम (universal iodization program) ने 1983 में आयोडीन नमक की शुरुआत की, जो लगभग 4 दशक पहले की बात है। फिर भी आज तक लोगों में आयोडीन की कमी है। और इसी वजह से लोगों में घेंघा (Goiter) और अन्य थायराइड रोग (thyroid disease) विकसित हो रहे हैं।

थायराइड रोग के कारण (thyroid disease causes)

थायरॉइड विकारों (thyroid disorders) के मामलों में वृद्धि के लिए दो मुख्य कारणों को जिम्मेदार माना जाता है, पहला है शिक्षा में कमी के कारण बीमारी के बारे में जागरूकता का न  होना और ऑटोइम्यूनिटी (autoimmunity), जो आजकल थायराइड विकार (thyroid disorder) का सबसे आम कारण है। आनुवंशिक गड़बड़ी (genetical issues) भी थायरॉइड रोग (thyroid disorders) के प्रमुख कारणों में से एक है।

निष्कर्ष (Conclusion)

ऐसे कई कारक हैं जो थायराइड रोगों (thyroid disease) का कारण बनते हैं जिनमें आनुवंशिक (genetical), पर्यावरण (environmental), आयोडीन की कमी, और तनाव संबंधित (stress related) कारण शामिल हैं। थायराइड विकारों (thyroid disorders) का प्रबंधन (managing) करने की कुंजी इसका जल्दी पता लगाना और उचित चिकित्सा और आहार संबंधी हस्तक्षेपों (dietary interventions) का पालन करना है।

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