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सिकल सेल रोग के लक्षण, कारण, जांच और इलाज

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सिकल सेल रोग के लक्षण, कारण, जांच और इलाज

author
Medically Reviewed ByDr. Mayanka Lodha Seth
Written By
Sheena Mehta
Last Edited BySheena MehtaJul 16, 2026
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सिकल सेल रोग (Sickle Cell Disease) एक आनुवंशिक (Genetic) रक्त विकार है, जिसमें लाल रक्त कोशिकाएं सामान्य गोल आकार की बजाय दरांती (Sickle) के आकार की हो जाती हैं। इससे शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह प्रभावित होता है और दर्द, एनीमिया, बार-बार संक्रमण तथा अंगों से जुड़ी गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं।

 

समय पर पहचान और उचित उपचार से इसकी जटिलताओं को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

 

इस लेख में जानें सिकल सेल रोग क्या है, इसके शुरुआती और गंभीर लक्षण, कारण, जांच, उपचार, बचाव और कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

 

सिकल सेल रोग क्या है?

हमारे खून में मौजूद लाल रक्त कोशिकाएं (Red Blood Cells) शरीर के हर हिस्से तक ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करती हैं। सामान्य स्थिति में ये कोशिकाएं गोल, मुलायम और लचीली होती हैं, इसलिए ये आसानी से छोटी-से-छोटी रक्त वाहिकाओं से गुजर जाती हैं।

 

सिकल सेल रोग में एक आनुवंशिक बदलाव के कारण ये लाल रक्त कोशिकाएं हंसिया या अर्धचंद्र के आकार की, कठोर और चिपचिपी हो जाती हैं। इससे वे रक्त वाहिकाओं में फंस सकती हैं, जिससे रक्त प्रवाह धीमा हो जाता है और शरीर के अंगों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती।

 

इसके कारण कई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं, जैसे:

  • तेज़ दर्द
  • एनीमिया (खून की कमी)
  • बार-बार संक्रमण
  • समय के साथ शरीर के विभिन्न अंगों को नुकसान

सिकल सेल रोग आनुवंशिक बीमारी है, यानी यह माता-पिता से बच्चों में होती है। यदि माता और पिता दोनों सिकल सेल जीन के वाहक हैं, तो प्रत्येक गर्भावस्था में बच्चे को यह रोग होने की 25% संभावना होती है।

 

सिकल सेल रोग के लक्षण

सिकल सेल रोग के लक्षण

सिकल सेल रोग के लक्षण हर व्यक्ति में एक जैसे नहीं होते। कुछ लोगों में लक्षण हल्के होते हैं, जबकि कुछ में गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं। अधिकांश मामलों में इसके लक्षण जन्म के लगभग 5 महीने बाद दिखाई देने लगते हैं।

 

1. दर्द का दौरा (Pain Crisis)

दर्द का दौरा सिकल सेल रोग का सबसे सामान्य और गंभीर लक्षण है। जब हंसिया के आकार की लाल रक्त कोशिकाएं छोटी रक्त वाहिकाओं में फंस जाती हैं, तो रक्त प्रवाह बाधित हो जाता है। इससे शरीर के प्रभावित हिस्से में अचानक तेज़ दर्द हो सकता है।

 

यह दर्द आमतौर पर हाथ-पैर, हड्डियों, जोड़ों, पेट या छाती में महसूस होता है और कुछ घंटों से लेकर कई दिनों तक रह सकता है। कई बार इसके साथ बुखार और सूजन भी हो सकती है।

 

2. खून की कमी (Anemia)

सिकल सेल रोग में असामान्य लाल रक्त कोशिकाएं सामान्य कोशिकाओं की तुलना में बहुत जल्दी नष्ट हो जाती हैं। इससे शरीर पर्याप्त नई कोशिकाएं नहीं बना पाता और एनीमिया (खून की कमी) हो जाती है।

 

इसके कारण लगातार थकान, कमजोरी, चक्कर आना, सांस फूलना और त्वचा का पीला पड़ना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

 

3. पीलिया (Jaundice)

सिकल कोशिकाओं के तेजी से टूटने पर शरीर में बिलिरुबिन का स्तर बढ़ सकता है, जिससे आंखें और त्वचा पीली दिखाई देने लगती हैं। कई मरीजों में यह समस्या समय-समय पर होती रहती है।

 

4. हाथ-पैरों में सूजन (Dactylitis)

छोटे बच्चों में हाथों और पैरों की उंगलियों में दर्द के साथ सूजन सिकल सेल रोग का शुरुआती संकेत हो सकता है। इसे डैक्टिलाइटिस (Dactylitis) कहा जाता है और यह रक्त प्रवाह बाधित होने के कारण होता है।

 

5. बार-बार संक्रमण

सिकल सेल रोग में तिल्ली (Spleen) धीरे-धीरे प्रभावित हो सकती है, जिससे शरीर की संक्रमण से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है। इसके कारण निमोनिया, मैनिन्जाइटिस और अन्य गंभीर संक्रमण बार-बार हो सकते हैं।

 

6. लगातार थकान और कमजोरी

शरीर के अंगों तक पर्याप्त ऑक्सीजन न पहुंचने के कारण मरीज को हर समय थकान, कमजोरी और हल्के काम करने पर भी सांस फूलने की समस्या हो सकती है।

 

7. बच्चों में विकास धीमा होना

सिकल सेल रोग से पीड़ित बच्चों में लंबे समय तक एनीमिया रहने के कारण लंबाई और वजन की वृद्धि सामान्य से धीमी हो सकती है। कुछ बच्चों में यौवन शुरू होने में भी देरी हो सकती है।

 

सिकल सेल रोग क्यों होता है?

सिकल सेल रोग HBB जीन में बदलाव (Mutation) के कारण होने वाला एक आनुवंशिक रोग है। यह जीन हीमोग्लोबिन बनाने के लिए जिम्मेदार होता है। जब इसमें बदलाव होता है, तो लाल रक्त कोशिकाएं सामान्य आकार की बजाय हंसिया (Sickle) के आकार की बनने लगती हैं।

 

यह बीमारी तभी होती है जब बच्चे को माता और पिता दोनों से सिकल सेल जीन विरासत में मिले।

  • एक माता-पिता से जीन मिलने पर, बच्चा सिकल सेल ट्रेट (Carrier) होता है। उसे आमतौर पर बीमारी नहीं होती, लेकिन वह यह जीन अपनी अगली पीढ़ी को दे सकता है।
  • दोनों माता-पिता से जीन मिलने पर, बच्चे को सिकल सेल रोग (Sickle Cell Disease) हो सकता है।

 

भारत में यह रोग विशेष रूप से मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, ओडिशा, गुजरात, झारखंड और असम के कुछ आदिवासी समुदायों में अधिक पाया जाता है।

 

सिकल सेल रोग की जांच कैसे होती है?

सिकल सेल रोग की पुष्टि के लिए डॉक्टर मरीज के लक्षण, पारिवारिक इतिहास और रक्त जांच के आधार पर निदान करते हैं। प्रमुख जांचें हैं:

  • Hemoglobin Electrophoresis: सिकल सेल रोग की पुष्टि के लिए सबसे महत्वपूर्ण जांच, जिसमें असामान्य हीमोग्लोबिन (HbS) की पहचान की जाती है।

  • CBC (Complete Blood Count): लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या, हीमोग्लोबिन और एनीमिया का आकलन करने के लिए।

  • Newborn Screening: नवजात शिशुओं में जन्म के तुरंत बाद खून की जांच से सिकल सेल रोग का जल्दी पता लगाया जा सकता है। भारत में राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन के तहत इस जांच को बढ़ावा दिया जा रहा है।

  • Genetic Testing: HBB जीन में बदलाव की पुष्टि करने और परिवार के अन्य सदस्यों में जोखिम का आकलन करने के लिए।

सिकल सेल रोग का इलाज क्या है?

फिलहाल सिकल सेल रोग का कोई सार्वभौमिक स्थायी इलाज नहीं है। हालांकि, सही इलाज और नियमित देखभाल से इसके लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है, दर्द के दौरों को कम किया जा सकता है और गंभीर जटिलताओं के जोखिम को घटाया जा सकता है।

 

उपचार के प्रमुख विकल्पों में शामिल हैं:

  • Hydroxyurea: यह सिकल सेल रोग के लिए सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली दवाओं में से एक है। यह दर्द के दौरों की संख्या और गंभीरता को कम करने में मदद करती है।

  • दर्द का प्रबंधन: दर्द के दौरे के दौरान डॉक्टर की सलाह के अनुसार दर्द निवारक दवाएं, पर्याप्त पानी पीना और आराम करना आवश्यक होता है।

  • रक्त आधान (Blood Transfusion): गंभीर एनीमिया, स्ट्रोक के जोखिम या अन्य जटिलताओं की स्थिति में रक्त चढ़ाने की आवश्यकता पड़ सकती है।

  • टीकाकरण और संक्रमण से बचाव: सिकल सेल रोग में संक्रमण का खतरा अधिक होता है। इसलिए निमोनिया, मैनिन्जाइटिस और अन्य जरूरी टीके समय पर लगवाना महत्वपूर्ण है।

  • बोन मैरो प्रत्यारोपण (Bone Marrow Transplant): कुछ चुनिंदा मरीजों में यह सिकल सेल रोग का संभावित स्थायी उपचार हो सकता है। हालांकि, इसके लिए उपयुक्त डोनर, विशेषज्ञ केंद्र और सावधानीपूर्वक चयन की आवश्यकता होती है।

  • जीन थेरेपी (Gene Therapy): हाल के वर्षों में कुछ देशों में सिकल सेल रोग के लिए जीन थेरेपी को मंजूरी मिली है। यह एक उभरता हुआ उपचार विकल्प है, लेकिन भारत में इसकी उपलब्धता अभी सीमित है।

 

महत्वपूर्ण: सिकल सेल रोग का उपचार हमेशा हेमेटोलॉजिस्ट (रक्त रोग विशेषज्ञ) की देखरेख में ही किया जाना चाहिए। बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा शुरू या बंद न करें।

 

डॉक्टर से कब मिलें?

यदि इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:

  • अचानक शुरू हुआ तेज़ दर्द, जो कम न हो।
  • छाती में दर्द या सांस लेने में तकलीफ।
  • हाथ या पैर में कमजोरी, सुन्नपन या बोलने में कठिनाई।
  • लगातार तेज़ बुखार, विशेषकर बच्चों में।
  • त्वचा या आंखों का अत्यधिक पीला पड़ना।
  • पेट में अचानक तेज़ दर्द।

 

निष्कर्ष

सिकल सेल रोग एक आनुवंशिक और आजीवन रहने वाला रक्त विकार है, लेकिन समय पर जांच, नियमित उपचार और उचित देखभाल से इसके लक्षणों और जटिलताओं को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। यदि आपके परिवार में सिकल सेल रोग का इतिहास है या आप ऐसे क्षेत्र से हैं जहाँ यह बीमारी अधिक पाई जाती है, तो Genetic Counseling और समय पर जांच करवाना एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। सही जानकारी, नियमित चिकित्सा देखभाल और जागरूकता से सिकल सेल रोग के साथ भी स्वस्थ और बेहतर जीवन जिया जा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. क्या सिकल सेल रोग पूरी तरह ठीक हो सकता है?

फिलहाल सिकल सेल रोग का कोई सार्वभौमिक स्थायी इलाज उपलब्ध नहीं है। हालांकि, दवाओं, नियमित जांच और सही देखभाल से इसके लक्षणों और जटिलताओं को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। कुछ चुनिंदा मरीजों में Bone Marrow Transplant संभावित स्थायी उपचार हो सकता है।

 

2. क्या सिकल सेल रोग जीवनभर रहता है?

हाँ। सिकल सेल रोग एक आनुवंशिक (Genetic) बीमारी है, इसलिए यह जीवनभर रहती है। हालांकि, समय पर इलाज, स्वस्थ जीवनशैली और नियमित फॉलो-अप से मरीज सामान्य और सक्रिय जीवन जी सकते हैं।

 

3. क्या सिकल सेल रोग छूने या साथ रहने से फैलता है?

नहीं। सिकल सेल रोग संक्रामक (Infectious) नहीं है। यह छूने, साथ रहने, खाना साझा करने या किसी भी तरह के सामान्य संपर्क से नहीं फैलता।

 

4. क्या सिकल सेल रोग में बच्चा सामान्य जीवन जी सकता है?

हाँ। समय पर जांच, नियमित इलाज, संतुलित आहार, पर्याप्त पानी, टीकाकरण और डॉक्टर की सलाह का पालन करने से सिकल सेल रोग से पीड़ित कई बच्चे सामान्य पढ़ाई, खेल और दैनिक गतिविधियाँ कर सकते हैं।

 

5. सिकल सेल रोग में कौन-सी चीजें नहीं खानी चाहिए?

सिकल सेल रोग में कोई विशेष भोजन पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं है। हालांकि, बहुत अधिक जंक फूड, मीठे पेय, शराब (वयस्कों में) और शरीर में पानी की कमी पैदा करने वाली आदतों से बचना चाहिए। संतुलित और पौष्टिक आहार लेना सबसे अच्छा रहता है।

 

6. क्या सिकल सेल रोग में व्यायाम करना सुरक्षित है?

हाँ, लेकिन हल्का से मध्यम व्यायाम ही करें। बहुत अधिक मेहनत वाला व्यायाम, शरीर में पानी की कमी और अत्यधिक गर्मी या ठंड दर्द के दौरे का जोखिम बढ़ा सकते हैं। व्यायाम से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है।

 

7. सिकल सेल रोग में दर्द होने पर तुरंत क्या करें?

पर्याप्त पानी पिएँ, आराम करें और डॉक्टर द्वारा बताई गई दर्द निवारक दवाएँ लें। यदि दर्द बहुत तेज़ हो, बुखार हो, साँस लेने में तकलीफ हो या दर्द कम न हो, तो तुरंत अस्पताल जाएँ।

 

8. सिकल सेल रोग में कौन-सा टेस्ट सबसे सही माना जाता है?

Hemoglobin Electrophoresis और HPLC (High-Performance Liquid Chromatography) सिकल सेल रोग की पुष्टि के लिए सबसे विश्वसनीय जांचों में शामिल हैं। आवश्यकता पड़ने पर Genetic Testing भी की जा सकती है।



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