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Heart Attack ke Lakshan: हार्ट अटैक के कारण, उपचार और बचाव

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Heart Attack ke Lakshan: हार्ट अटैक के कारण, उपचार और बचाव

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Medically Reviewed ByDr. Mayanka Lodha Seth
Written By
Sheena Mehta
Last Edited BySheena MehtaJul 20, 2026
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हार्ट अटैक एक गंभीर चिकित्सीय आपातस्थिति है, लेकिन इसके लक्षण हमेशा अचानक और एक जैसे नहीं होते। कई लोगों में हार्ट अटैक से पहले घंटों, दिनों या कभी-कभी हफ्तों पहले भी चेतावनी के संकेत दिखाई देने लगते हैं। इन शुरुआती लक्षणों को समय रहते पहचानना जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

 

भारत में हृदय रोग तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं में से एक हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, देश में होने वाली कुल मौतों का एक बड़ा हिस्सा हृदय रोगों के कारण होता है, और हाल के वर्षों में हार्ट अटैक के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। चिंता की बात यह है कि अब कम उम्र के लोगों में भी हार्ट अटैक के मामले बढ़ रहे हैं।

 

इस लेख में जानेंगे कि हार्ट अटैक के लक्षण क्या होते हैं, पुरुषों और महिलाओं में ये कैसे अलग हो सकते हैं, हार्ट अटैक से पहले शरीर कौन-से संकेत देता है और किन लक्षणों को कभी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।

 

हार्ट अटैक क्या होता है?

हार्ट अटैक तब होता है जब हृदय की मांसपेशियों तक रक्त की आपूर्ति गंभीर रूप से कम हो जाती है या पूरी तरह बंद हो जाती है। ऐसा आमतौर पर तब होता है, जब कोरोनरी धमनियों (Coronary Arteries) में वसा, कोलेस्ट्रॉल और अन्य पदार्थ जमा होकर रक्त प्रवाह में रुकावट पैदा कर देते हैं।

 

जब हृदय को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती, तो उसकी मांसपेशियां क्षतिग्रस्त होने लगती हैं। इसलिए हार्ट अटैक में समय पर इलाज बेहद महत्वपूर्ण होता है। विशेषज्ञ इसे "गोल्डन आवर (Golden Hour)" कहते हैं, क्योंकि लक्षण शुरू होने के पहले एक घंटे के भीतर उपचार मिलने पर हृदय को होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है और जान बचने की संभावना बढ़ जाती है।

 

हार्ट अटैक के लक्षण

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1. सीने में दर्द, दबाव या भारीपन

यह हार्ट अटैक का सबसे आम और प्रमुख लक्षण है। सीने के बीच या बाईं ओर दर्द, दबाव, जकड़न, भारीपन या निचोड़ने जैसा एहसास हो सकता है। यह तकलीफ कुछ मिनटों तक बनी रह सकती है, बीच-बीच में कम होकर फिर वापस आ सकती है। कई लोग इसे गैस या बदहजमी समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं, जबकि ऐसा करना खतरनाक हो सकता है। यदि सीने का दर्द 15 मिनट या उससे अधिक समय तक बना रहे, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।

 

2. दर्द का बाएं हाथ, जबड़े, गर्दन या पीठ तक फैलना

हार्ट अटैक का दर्द केवल सीने तक सीमित नहीं रहता। यह बाएं हाथ, दोनों हाथों, जबड़े, गर्दन, कंधे, ऊपरी पीठ या कभी-कभी पेट तक भी फैल सकता है। सीने से शुरू होकर बाएं हाथ की ओर जाने वाला दर्द हार्ट अटैक का एक सामान्य संकेत माना जाता है।

 

3. अचानक साँस फूलना

साँस लेने में तकलीफ हार्ट अटैक का महत्वपूर्ण लक्षण है। यह सीने में दर्द के साथ या उसके बिना भी हो सकती है। यदि आराम करते समय या हल्की गतिविधि के दौरान अचानक साँस फूलने लगे, तो इसे सामान्य कमजोरी समझकर अनदेखा न करें।

 

4. ठंडा पसीना, जी मिचलाना और चक्कर आना

हार्ट अटैक के दौरान ठंडा पसीना आना, मतली, उल्टी जैसा महसूस होना या चक्कर आना भी आम लक्षण हैं। कई बार ये फ्लू या अपच जैसे लगते हैं, लेकिन यदि ये सीने में दर्द या साँस फूलने के साथ हों, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

 

5. असामान्य थकान

बिना किसी स्पष्ट कारण के अत्यधिक थकान महसूस होना, खासकर महिलाओं में, हार्ट अटैक का शुरुआती संकेत हो सकता है। यदि पर्याप्त आराम के बाद भी थकान दूर न हो या कई दिनों से लगातार बनी रहे, तो इसे सामान्य कमजोरी मानकर न टालें।

 

6. दिल की धड़कन तेज़ या अनियमित होना

कुछ लोगों को हार्ट अटैक के दौरान दिल की धड़कन तेज़, अनियमित या ज़ोर-ज़ोर से धड़कती हुई महसूस हो सकती है। यदि यह लक्षण सीने में दर्द, साँस फूलने या चक्कर आने के साथ दिखाई दे, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेना आवश्यक है।

 

महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण

महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण

महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण हमेशा पुरुषों जैसे नहीं होते। कई बार ये धीरे-धीरे शुरू होते हैं और इन्हें एसिडिटी, गैस, फ्लू, तनाव या सामान्य थकान समझकर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है। यही वजह है कि महिलाओं में हार्ट अटैक की पहचान कई बार देर से होती है।

 

महिलाओं में हार्ट अटैक के सामान्य लक्षणों में शामिल हैं:

  • लगातार और असामान्य थकान, जो आराम करने के बाद भी दूर न हो।
  • जबड़े, गर्दन, कंधे या ऊपरी पीठ में दर्द या दबाव।
  • सीने में दर्द के बिना भी अचानक साँस फूलना।
  • जी मिचलाना, उल्टी या बदहजमी जैसा महसूस होना।
  • ऊपरी पेट, गर्दन, जबड़े या पीठ में दर्द, जो हमेशा बाएं हाथ तक नहीं फैलता।
  • हार्ट अटैक से पहले कई दिनों तक नींद में गड़बड़ी या बेचैनी महसूस होना।

 

ध्यान रखें कि महिलाओं में भी सीने में दर्द या दबाव हार्ट अटैक का सबसे आम लक्षण है। हालांकि, कुछ महिलाओं में इसकी जगह ऊपरी पीठ या सीने में कसाव, भारीपन या दबाव जैसा एहसास अधिक प्रमुख हो सकता है। ऐसे किसी भी लक्षण को हल्के में न लें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

 

साइलेंट हार्ट अटैक क्या होता है?

साइलेंट हार्ट अटैक वह स्थिति है, जिसमें हृदय की मांसपेशियों को नुकसान तो पहुंचता है, लेकिन इसके लक्षण बहुत हल्के या अस्पष्ट होते हैं। कई लोगों को केवल हल्की बेचैनी, असामान्य थकान, बदहजमी या हल्का साँस फूलना महसूस होता है, इसलिए वे इसे सामान्य समस्या समझकर अनदेखा कर देते हैं। कई मामलों में इसका पता बाद में ECG (EKG), इकोकार्डियोग्राफी या अन्य हृदय जांचों के दौरान चलता है।

 

साइलेंट हार्ट अटैक का जोखिम मधुमेह (Diabetes) से पीड़ित लोगों, 75 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों और महिलाओं में अपेक्षाकृत अधिक देखा जाता है।

 

यह स्थिति इसलिए अधिक खतरनाक मानी जाती है क्योंकि समय पर पहचान और इलाज न मिलने से हृदय की मांसपेशियों को लगातार नुकसान पहुंचता रहता है। इसलिए यदि असामान्य थकान, साँस फूलना या सीने में बार-बार हल्की बेचैनी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो उन्हें नज़रअंदाज़ करने के बजाय डॉक्टर से तुरंत सलाह लें।

 

हार्ट अटैक के कारण

हार्ट अटैक का सबसे आम कारण कोरोनरी आर्टरी डिजीज (Coronary Artery Disease - CAD) है। इस स्थिति में हृदय की धमनियों में कोलेस्ट्रॉल, वसा और अन्य पदार्थ जमा होकर प्लाक (Plaque) बना लेते हैं, जिससे रक्त प्रवाह कम या पूरी तरह बंद हो सकता है।

 

हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ाने वाले प्रमुख कारक हैं:

  • उच्च रक्तचाप धमनियों की दीवारों को नुकसान पहुंचाकर हृदय रोग का खतरा बढ़ाता है।
  • उच्च कोलेस्ट्रॉल धमनियों में प्लाक बनने की प्रक्रिया को तेज़ करता है।
  • मधुमेह हृदय रोग और हार्ट अटैक का जोखिम काफी बढ़ा देता है।
  • धूम्रपान करने वालों में हार्ट अटैक का खतरा गैर-धूम्रपान करने वालों की तुलना में 3–4 गुना अधिक हो सकता है।
  • मोटापा,विशेष रूप से पेट के आसपास अतिरिक्त चर्बी हृदय रोग के जोखिम से जुड़ी होती है।
  • लगातार तनाव रक्तचाप और हृदय पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
  • शारीरिक निष्क्रियता, नियमित व्यायाम की कमी हृदय रोग का जोखिम बढ़ाती है।
  • यदि परिवार में कम उम्र में हार्ट अटैक या हृदय रोग का इतिहास रहा हो, तो जोखिम बढ़ सकता है।

 

इन जोखिम कारकों में से कई को स्वस्थ खान-पान, नियमित व्यायाम, धूम्रपान से दूरी और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच के माध्यम से नियंत्रित किया जा सकता है।

 

हार्ट अटैक होने पर तुरंत क्या करें?

यदि आपको या आपके आसपास किसी व्यक्ति को सीने में दर्द, दबाव, साँस फूलना या हार्ट अटैक के अन्य लक्षण महसूस हों, तो 5 मिनट से अधिक इंतज़ार न करें। तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता प्राप्त करें।

 

तुरंत क्या करें?

  • एम्बुलेंस (102 या 112) को तुरंत कॉल करें। यदि संभव हो, तो खुद वाहन चलाकर अस्पताल न जाएं।
  • मरीज को आरामदायक स्थिति में बैठाएं या आधा लेटा दें और उसे शांत रहने दें।
  • तंग कपड़े, जैसे कॉलर या बेल्ट, ढीले कर दें ताकि सांस लेने में आसानी हो।
  • यदि डॉक्टर ने पहले से Aspirin लेने की सलाह दी है, तभी उसे दें। बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा न दें।
  • मरीज को अकेला न छोड़ें और उसकी स्थिति पर लगातार नजर रखें।
  • यदि मरीज बेहोश हो जाए और सांस या नाड़ी न मिले, तो प्रशिक्षित होने पर तुरंत CPR (Cardiopulmonary Resuscitation) शुरू करें।

 

क्या नहीं करना चाहिए?

  • यह सोचकर इंतज़ार न करें कि "थोड़ी देर में ठीक हो जाएगा।"
  • मरीज को खुद वाहन चलाकर अस्पताल जाने की सलाह न दें।
  • डॉक्टर की सलाह के बिना खाना, पानी या कोई अन्य दवा न दें।
  • मरीज को अकेला न छोड़ें, क्योंकि उसकी स्थिति अचानक गंभीर हो सकती है।

 

हार्ट अटैक की जांच कैसे होती है?

अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टर लक्षणों और मरीज की स्थिति के आधार पर तुरंत कुछ महत्वपूर्ण जांचें करते हैं, ताकि हार्ट अटैक की पुष्टि हो सके और जल्द से जल्द इलाज शुरू किया जा सके।

 

  • ECG (Electrocardiogram/EKG): यह हार्ट अटैक की पहचान के लिए सबसे पहली और सबसे तेज़ जांच है। इससे हृदय की विद्युत गतिविधि और असामान्य बदलावों का पता चलता है।

  • Troponin Test (Cardiac Enzyme Test): यह रक्त जांच हृदय की मांसपेशियों को हुए नुकसान का पता लगाती है। खून में Troponin का बढ़ा हुआ स्तर हार्ट अटैक का महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है।

  • Echocardiogram (2D Echo): इसमें अल्ट्रासाउंड की मदद से हृदय की संरचना, पंपिंग क्षमता और वाल्वों की कार्यप्रणाली की जांच की जाती है।

  • Coronary Angiography: इस जांच से हृदय की धमनियों में रुकावट का सटीक स्थान और उसकी गंभीरता का पता चलता है, जिससे आगे के उपचार, जैसे एंजियोप्लास्टी या स्टेंट, की योजना बनाई जा सकती है।

हार्ट अटैक का इलाज

हार्ट अटैक के इलाज का सबसे बड़ा उद्देश्य हृदय की मांसपेशियों तक रक्त प्रवाह को जितनी जल्दी हो सके बहाल करना है, ताकि हृदय को होने वाले नुकसान को कम किया जा सके। इलाज मरीज की स्थिति, धमनियों में रुकावट की गंभीरता और अस्पताल पहुंचने के समय पर निर्भर करता है।

  • थ्रोम्बोलाइसिस (Thrombolysis): इसमें खून के थक्के को घोलने वाली दवाएं दी जाती हैं। यदि समय पर एंजियोप्लास्टी संभव न हो, तो डॉक्टर यह उपचार चुन सकते हैं।
  • एंजियोप्लास्टी और स्टेंट (Angioplasty with PCI): यह हार्ट अटैक का सबसे प्रभावी उपचार माना जाता है। इसमें एक पतली कैथेटर की मदद से बंद धमनी को खोला जाता है और रक्त प्रवाह बनाए रखने के लिए स्टेंट लगाया जाता है।
  • बायपास सर्जरी (CABG): यदि कई धमनियों में गंभीर रुकावट हो या एंजियोप्लास्टी उपयुक्त न हो, तो बायपास सर्जरी की जा सकती है।
  • दवाएं: इलाज के बाद दोबारा हार्ट अटैक के जोखिम को कम करने के लिए डॉक्टर ब्लड थिनर्स (Blood Thinners), बीटा-ब्लॉकर्स (Beta Blockers), स्टैटिन्स (Statins) और ACE Inhibitors जैसी दवाएं लिख सकते हैं। इनका सेवन हमेशा डॉक्टर के निर्देशानुसार ही करें।

 

हार्ट अटैक से बचाव कैसे करें?

अच्छी बात यह है कि हार्ट अटैक के कई प्रमुख जोखिम कारकों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके लिए इन आदतों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं:

  • नियमित व्यायाम करें। सप्ताह में कम से कम 150 मिनट मध्यम तीव्रता वाला व्यायाम करें।
  • धूम्रपान और तंबाकू से पूरी तरह दूरी बनाएं।
  • ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की समय-समय पर जांच कराएं और उन्हें नियंत्रित रखें।
  • संतुलित आहार लें। तले-भुने, अत्यधिक नमक वाले और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें। फल, सब्जियां, साबुत अनाज और स्वस्थ वसा को प्राथमिकता दें।
  • स्वस्थ वजन बनाए रखें, विशेषकर पेट के आसपास अतिरिक्त चर्बी से बचें।
  • तनाव को नियंत्रित करें| योग, ध्यान, गहरी सांस लेने के अभ्यास और पर्याप्त आराम तनाव कम करने में मदद कर सकते हैं।
  • हर रात 7–9 घंटे की अच्छी नींद लें।
  • 30 वर्ष की उम्र के बाद, या यदि परिवार में हृदय रोग का इतिहास हो, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित हृदय स्वास्थ्य जांच कराते रहें।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. हार्ट अटैक आने से पहले कौन-कौन से संकेत मिलते हैं?


हार्ट अटैक से पहले सीने में दबाव या दर्द, असामान्य थकान, साँस फूलना, ठंडा पसीना, जबड़े या बाएं हाथ में दर्द और चक्कर आना जैसे संकेत दिखाई दे सकते हैं। ये लक्षण घंटों, दिनों या कभी-कभी हफ्तों पहले भी शुरू हो सकते हैं।

2. क्या हार्ट अटैक बिना सीने में दर्द के भी हो सकता है?


हाँ। खासकर महिलाओं, मधुमेह के मरीजों और बुजुर्गों में हार्ट अटैक बिना तेज़ सीने के दर्द के भी हो सकता है। ऐसे मामलों में साँस फूलना, अत्यधिक थकान, मतली या जबड़े और पीठ में दर्द जैसे लक्षण अधिक दिखाई दे सकते हैं।

3. गैस और हार्ट अटैक के दर्द में अंतर कैसे पहचानें?


गैस का दर्द आमतौर पर खाने या पाचन से जुड़ा होता है और कुछ समय बाद कम हो जाता है। जबकि हार्ट अटैक में सीने में दबाव या जकड़न के साथ दर्द हाथ, जबड़े, गर्दन या पीठ तक फैल सकता है और साँस फूलना या ठंडा पसीना भी आ सकता है। संदेह होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

4. क्या युवाओं को भी हार्ट अटैक हो सकता है?


हाँ। आजकल 30–40 वर्ष की उम्र के लोगों में भी हार्ट अटैक के मामले बढ़ रहे हैं। धूम्रपान, तनाव, मधुमेह, मोटापा, उच्च कोलेस्ट्रॉल और निष्क्रिय जीवनशैली इसके प्रमुख कारण हैं।

5. हार्ट अटैक आने पर सबसे पहले क्या करना चाहिए?


तुरंत एम्बुलेंस (102 या 112) बुलाएं, मरीज को आराम से बैठाएं और बिना देर किए अस्पताल पहुंचाएं। यदि डॉक्टर ने पहले से Aspirin लेने की सलाह दी हो, तभी दें। खुद गाड़ी चलाकर अस्पताल जाने की बजाय आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।

6. हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में क्या अंतर है?


हार्ट अटैक तब होता है जब हृदय तक रक्त का प्रवाह रुक जाता है। कार्डियक अरेस्ट में हृदय अचानक धड़कना बंद कर देता है। हार्ट अटैक कभी-कभी कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकता है, लेकिन दोनों एक जैसी स्थिति नहीं हैं।

7. हार्ट अटैक की पुष्टि किस टेस्ट से होती है?


हार्ट अटैक की पुष्टि के लिए डॉक्टर आमतौर पर ECG (Electrocardiogram) और Troponin Test करवाते हैं। जरूरत पड़ने पर Echocardiogram और Coronary Angiography भी की जा सकती है।

8. हार्ट अटैक का दर्द कितनी देर तक रहता है?


हार्ट अटैक में सीने का दर्द या दबाव अक्सर 15 मिनट या उससे अधिक समय तक बना रहता है या बार-बार लौट सकता है। यदि ऐसा हो, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।

9. क्या हार्ट अटैक के बाद व्यक्ति सामान्य जीवन जी सकता है?


हाँ। समय पर इलाज, नियमित दवाएं, संतुलित आहार, व्यायाम, धूम्रपान से परहेज़ और डॉक्टर की सलाह का पालन करके अधिकांश लोग सामान्य और सक्रिय जीवन जी सकते हैं।

10. हार्ट अटैक से बचने के लिए कौन-कौन सी जांचें नियमित करानी चाहिए?


जोखिम वाले लोगों को नियमित रूप से ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, लिपिड प्रोफाइल (कोलेस्ट्रॉल), ECG और डॉक्टर की सलाह के अनुसार अन्य हृदय संबंधी जांचें करानी चाहिए। नियमित स्वास्थ्य जांच से जोखिम का समय रहते पता लगाया जा सकता।

References:

  1. American Heart Association: Warning Signs of a Heart Attack
  2. Mayo Clinic - Heart attack symptoms: Know what's a medical emergency
  3. Welia Health - Heart attack symptoms in women: Signs many people miss
  4. SAAOL Delhi - Heart Attack at a Young Age in 2026: Causes, Signs & Prevention

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