898 898 8787

ज्यादा नींद आना किस बीमारी के लक्षण हैं?

Hindi

ज्यादा नींद आना किस बीमारी के लक्षण है

author

Medically Reviewed By
Dr. Mayanka Lodha Seth

Written By Sheena Mehta
on Dec 3, 2025

Last Edit Made By Sheena Mehta
on Dec 3, 2025

share
https://myhealth-redcliffelabs.redcliffelabs.com/media/blogcard-images/None/2afdcdc8-e6f8-4ad1-88be-74e9ef4ffa56.webp
share

ज्यादा नींद आना किस बीमारी के लक्षण है 

ज्यादा नींद आना (हाइपरसोमनिया / Excessive Daytime Sleepiness) सिर्फ आलस्य नहीं है| यह कई स्वास्थ्य स्थितियों का संकेत हो सकता है। यदि आप अक्सर दिन में बार-बार सोने लगते हैं, जाग कर थका-थका महसूस करते हैं या पूरी नींद के बाद भी ताजगी नहीं रहती, तो इसे नजरअंदाज न करें। इस ब्लॉग में आसान हिंदी में बताया जाएगा कि ज्यादा नींद किन बीमारियों में दिखाई देती है, कैसे पहचानें, किन जांचों की ज़रूरत होती है और क्या इलाज उपलब्ध हैं। 

ज्यादा नींद (हाइपरसोमनिया) क्या है?

हाइपरसोमनिया का मतलब है रात में पर्याप्त सोने के बावजूद दिन में अत्यधिक नींद आना, बार-बार झपकी लेना और नपा-तौला काम करने में असमर्थता। कुछ मामलों में व्यक्ति को उठने में बहुत कठिनाई होती है और उसके छोटे-छोटे नैप्स भी तरोताजा नहीं करते। यह समस्या साधारण थकान या सामान्य आलस से बिल्कुल अलग होती है।

किन बीमारियों/स्थितियों में ज्यादा नींद आ सकती है?

1) नार्कोलेप्सी (Narcolepsy)

नार्कोलेप्सी में दिन में अचानक गहरी नींद आ सकती है, और कभी-कभी व्यक्ति बात करते-करते या चलते-फिरते सो सकता है। इससे नींद के साथ-साथ मांसपेशियों का अचानक ढीला पड़ना (cataplexy) भी हो सकता है। 

2) इडियोपैथिक हाइपरसोमनिया (Idiopathic Hypersomnia)

यह ऐसी स्थिति है जिसमें कारण स्पष्ट नहीं होता, लेकिन लगातार अधिक नींद और “जागना मुश्किल” जैसा एहसास रहता है। नापसंदनीय नींद के बाद भी आराम महसूस नहीं होता।

3) स्लीप एपनेया (Sleep Apnea)

रात को बार-बार साँस रुकने से नींद का चक्र बिगड़ता है| व्यक्ति सतर्क नहीं सो पाता, जिसके कारण दिन में बहुत नींद आती है। अक्सर इसमे खर्राटे और साँस रुकने की शिकायत भी होती है। 

4) क्लाइन-लेविन सिंड्रोम (Kleine-Levin Syndrome)

दुर्लभ लेकिन गंभीर स्थिति है जिसमें सप्ताहों तक लगातार सोना, अत्यधिक भूख, व्यवहार परिवर्तन जैसी शिकायतें हो सकती हैं। अक्सर किशोरों में दिखता है। 

5) मनोवैज्ञानिक कारण (डिप्रेशन/एंग्ज़ायटी)

डिप्रेशन और कुछ मानसिक समस्याएँ भी नींद के पैटर्न बदल देती हैं| कभी ज्यादा सोना, कभी कम। थकावट और इच्छाशक्ति में कमी आम हैं। 

6) दवाइयाँ, शराब, और प्रतिबन्ध (Substance-related)

कुछ दवाइयां (एंटीडिप्रेसेंट्स, एंटीहिस्टामाइन), अधिक शराब या नशीली दवाएँ नींद बढ़ा सकते हैं। दवा बदलने पर भी नींद पैटर्न बदल सकता है। 

7) अन्य शारीरिक रोग

थायरॉयड विकार, मधुमेह, दिल-फेफड़ों की बीमारियाँ, ब्रेन-इंजरी या न्यूरोलॉजिकल स्थितियाँ भी अत्यधिक नींद का कारण बन सकती हैं। 

हाइपरसोमनिया की पहचान: कौन-से लक्षण संकेत देते हैं?

  • दिन में बार-बार झपकी आना, काम पर ध्यान न लगना।

  • सुबह उठने पर भारीपन और “दिमाग धुंधला” महसूस होना।

  • लंबे नैप्स के बाद भी तरोताजा न लगना।

  • रात में बार-बार श्वास रुकना/खर्राटे (sleep apnea संकेत)।

  • अचानक सो जाने के एपिसोड (नार्कोलेप्सी में)।

  • मूड में गिरावट, काम में लगातार गिरावट।

डॉक्टर से कब मिलना चाहिए? तत्काल संकेत

  • दिन में अचानक अनियंत्रित नींद के एपिसोड

  • ड्राइविंग या मशीन चलाते समय नींद आना - यह बहुत खतरनाक हो सकता है

  • रात में साँस रुकना या बहुत तेज खर्राटे

  • मूड में गंभीर गिरावट या आत्म-हानि के विचार

इन स्थितियों में तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करें।

हाइपरसोमनिया का निदान: डॉक्टर कौन सी जांचें कर सकते हैं?

  • स्लीप स्टडी (Polysomnography): रात में सोते समय मस्तिष्क तरंगों, साँस, ऑक्सीजन और दिल की धड़कन को रिकॉर्ड करके स्लीप एपनेया और नींद की गुणवत्ता का मूल्यांकन किया जाता है

  • मल्टीपल स्लीप लेटेंसी टेस्ट (MSLT): दिन में झपकी आने की प्रवृत्ति मापने के लिए। यह नार्कोलेप्सी व हाइपरसोमनिया में उपयोगी है।

  • रक्त परीक्षण: थायरॉयड, डायबिटीज़, विटामिन-घाट, और दवाइयों की जाँच।

  • मानसिक स्वास्थ्य आकलन: डिप्रेशन या अन्य मनोवैज्ञानिक कारणों के लिए।

इलाज और प्रबंधन

  • लाइफस्टाइल: नियमित सोने-जागने का समय, अच्छी नींद-हाइजीन (सोने से पहले स्क्रीन कम करना, कैफीन सीमित करना), और दिन में छोटा -सुरक्षित नैप लेना।

  • दवाइयाँ: कुछ मामलों में डॉक्टर जागरूकता बढ़ाने वाली दवाइयाँ (modafinil आदि) देते हैं, खासकर नार्कोलेप्सी/हाइपरसोमनिया में।

  • CPAP: यदि स्लीप एपनेया पाया जाए तो CPAP मशीन से रात में साँस सही रखने पर दिन में नींद कम हो सकती है।

  • मनोवैज्ञानिक इलाज: डिप्रेशन/एंग्जायटी के लिए CBT या थेरेपी मददगार।

इलाज का चयन पूरी तरह कारण पर निर्भर करता है| इसलिए सही निदान आवश्यक है।

रोज़मर्रा के महत्वपूर्ण सुझाव: अभी क्या करें?

  1. सोने-जागने का नियमित शेड्यूल बनाएँ।

  2. रात में कैफीन और भारी भोजन से बचें।

  3. रोज़ाना हल्की-फुल्की एक्सरसाइज़ करें| यह सेरोटोनिन और एंडोर्फिन बढ़ाकर नींद में सुधार करता है|

  4. यदि दवा ले रहे हैं तो डॉक्टर से चर्चा करें| कुछ दवाइयाँ नींद बढ़ाती हैं।

  5. अगर आपकी नींद ड्राइविंग या काम पर असर डाल रही है, तुरंत डॉक्टर से मिलें।

निष्कर्ष

ज्यादा नींद अक्सर किसी अंतर्निहित समस्या का संकेत होती है| यह सिर्फ आलस्य नहीं माना जाना चाहिए। नार्कोलेप्सी, इडियोपैथिक हाइपरसोमनिया, स्लीप एपनेया, मानसिक या शारीरिक रोग और दवाइयाँ| ये सभी कारण हो सकते हैं। सही पहचान के लिए स्लीप-स्टडी व डॉक्टर की सलाह आवश्यक है; इलाज कारण के अनुसार उपलब्ध है और जीवन-शैली में छोटे बदलाव भी काफी फर्क ला सकते हैं। यदि आपकी दिनचर्या और सुरक्षा प्रभावित हो रही है तो डॉक्टर से सलाह लेना न भूलें।

 

Leave a comment

Consult Now

Share MyHealth Blog