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सांस लेने में दिक्कत के घरेलू उपचार: घर पर आज़माएँ ये उपाय

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सांस लेने में दिक्कत के घरेलू उपचार: घर पर आज़माएँ ये उपाय

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Medically Reviewed By
Dr. Mayanka Lodha Seth

Written By Ankita Mishra
on Dec 27, 2025

Last Edit Made By Ankita Mishra
on Dec 29, 2025

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आजकल बढ़ते प्रदूषण की वजह से साँस लेना भी मुश्किल होता जा रहा है। खासतौर पर दिल्ली जैसे शहरों में, जहाँ कई बार AQI 400 से ऊपर चला जाता है और स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। ऐसे माहौल में साँसों से जुड़ी समस्याएँ अब आम होती जा रही हैं।

साँस लेने में तकलीफ के पीछे कई कारण एक-दूसरे से जुड़े होते हैं- जैसे हवा में मौजूद ज़हरीले कण, धूल-मिट्टी, धुआँ, एलर्जी, फेफड़ों की कमज़ोरी और पहले से मौजूद श्वसन संबंधी रोग। लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और अन्य श्वसन रोगों का खतरा और भी बढ़ जाता है।

इसलिए ज़रूरी है कि हम समय रहते सावधान हों, अपनी सेहत पर ध्यान दें और प्रदूषण से बचाव के उपाय अपनाएँ, ताकि साँस लेना फिर से आसान और सुरक्षित हो सके।

इस ब्लॉग के माध्यम से हम यह जानने की कोशिश करेंगे कि साँस लेने में दिक्कत के लक्षण क्या हैं, इसके प्रमुख कारण कौन-से हैं और साँस लेने में दिक्कत के घरेलू उपचार क्या हो सकते हैं। इन सभी प्रश्नों के उत्तर आपको इस ब्लॉग में विस्तार से मिलेंगे।

साँस लेने में दिक्कत के लक्षण क्या हैं ?

आइए जानते हैं साँस लेने में दिक्कत के लक्षण

साँस फूलना

थोड़ा सा चलने, सीढ़ियाँ चढ़ने या सामान्य काम करने पर भी जल्दी साँस फूलना साँस की समस्या का प्रमुख लक्षण है। इसमें व्यक्ति को लगता है कि उसे पर्याप्त हवा नहीं मिल पा रही है।

छाती में जकड़न

साँस लेते समय सीने में भारीपन, दबाव या कसाव महसूस होना फेफड़ों या हृदय से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है, जिससे साँस लेने में असहजता होती है।

तेज या उथली साँस

साँस बहुत तेजी से चलना या बहुत हल्की साँस आना शरीर में ऑक्सीजन की कमी को दर्शाता है। यह स्थिति घबराहट और बेचैनी बढ़ा सकती है।

सीटी जैसी आवाज़ आना

साँस लेते या छोड़ते समय सीटी जैसी आवाज़ आना अक्सर अस्थमा, एलर्जी या सांस की नलियों में सूजन का लक्षण होता है।

लेटने पर साँस की परेशानी

कुछ लोगों को सीधा लेटते ही साँस लेने में ज्यादा दिक्कत होती है और उन्हें तकिया ऊँचा रखकर सोने की जरूरत पड़ती है, जो फेफड़ों या दिल से जुड़ी समस्या की ओर इशारा करता है।

होंठ या नाखून नीले पड़ना

होंठ, उंगलियों या नाखूनों का नीला पड़ना शरीर में ऑक्सीजन की कमी का गंभीर संकेत है और इसमें तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

चक्कर या अत्यधिक थकान

साँस की समस्या के कारण शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिससे चक्कर आना, कमजोरी या अत्यधिक थकान महसूस हो सकती है।

साँस लेने में दिक्कत के कारण

अस्थमा (दमा)

अस्थमा में सांस की नलियों में सूजन आ जाती है, जिससे साँस लेते समय घरघराहट, सीटी जैसी आवाज़ और साँस फूलने की समस्या होती है। धूल, धुआँ या ठंडी हवा इसे बढ़ा सकती है।

एलर्जी और संक्रमण

धूल, परागकण, धुआँ या किसी खास गंध से एलर्जी होने पर साँस लेने में परेशानी हो सकती है। इसके अलावा सर्दी-जुकाम, ब्रोंकाइटिस या निमोनिया जैसे संक्रमण भी साँस की समस्या पैदा करते हैं।

फेफड़ों की बीमारियाँ

सीओपीडी (COPD), टीबी या फेफड़ों में सूजन जैसी स्थितियों में फेफड़े ठीक से काम नहीं कर पाते, जिससे साँस लेने में लगातार दिक्कत बनी रहती है।

हृदय से जुड़ी समस्याएँ

दिल की कमजोरी या हार्ट अटैक जैसी स्थितियों में शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिससे अचानक या धीरे-धीरे साँस फूलने लगती है।

एनीमिया (खून की कमी)

खून में हीमोग्लोबिन की कमी होने पर शरीर तक ऑक्सीजन कम पहुँचती है, जिसके कारण हल्का काम करने पर भी साँस फूलने लगती है।

मोटापा

अधिक वजन होने से छाती और फेफड़ों पर दबाव पड़ता है, जिससे साँस लेने में कठिनाई हो सकती है, खासकर चलते-फिरते या लेटने पर।

तनाव और घबराहट

अत्यधिक तनाव, घबराहट या पैनिक अटैक के दौरान तेज साँस चलने लगती है और व्यक्ति को साँस की कमी महसूस होती है, जबकि फेफड़े सामान्य होते हैं।

धूम्रपान और प्रदूषण

धूम्रपान करने वालों और ज्यादा प्रदूषण वाले वातावरण में रहने वालों को साँस की समस्या होने की संभावना अधिक होती है, क्योंकि इससे फेफड़े कमजोर हो जाते हैं।

सांस लेने में दिक्कत के घरेलू उपचार

भाप लेना

गर्म पानी की भाप लेने से नाक और छाती में जमी बलगम ढीली होती है, जिससे सांस की नलियाँ खुलती हैं और सांस लेना आसान हो जाता है। दिन में 1–2 बार भाप लेना फायदेमंद हो सकता है।

अदरक का सेवन

अदरक में सूजन कम करने वाले गुण होते हैं, जो सांस की नलियों को आराम देते हैं। अदरक की चाय पीने या कच्चे अदरक का छोटा टुकड़ा चबाने से सांस की समस्या में राहत मिल सकती है।

हल्दी वाला दूध

हल्दी में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। रात को सोने से पहले गुनगुने दूध में आधा चम्मच हल्दी मिलाकर पीने से फेफड़ों को मजबूती मिलती है।

तुलसी के पत्ते

तुलसी सांस से जुड़ी समस्याओं में बेहद लाभकारी मानी जाती है। रोज सुबह 4–5 ताजे तुलसी के पत्ते चबाने या तुलसी की चाय पीने से सांस लेने में आराम मिलता है।

गहरी सांस लेने का अभ्यास

प्राणायाम और गहरी सांस लेने के अभ्यास से फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है। यह तनाव कम करता है और सांस फूलने की समस्या में धीरे-धीरे सुधार लाता है।

सही मुद्रा में बैठना और सोना

सीधे बैठकर सांस लेना और सोते समय सिर को थोड़ा ऊँचा रखकर सोना छाती पर दबाव कम करता है, जिससे सांस लेने में आसानी होती है।

गर्म पानी का सेवन

दिन भर गुनगुना पानी पीने से गले और सांस की नलियों में जमा कफ ढीला पड़ता है, जिससे सांस लेने में राहत मिलती है।

धूल-धुएं से बचाव

धूल, धुआँ और प्रदूषण सांस की परेशानी को बढ़ा सकते हैं। साफ वातावरण में रहें और जरूरत पड़ने पर मास्क का उपयोग करें।

FAQ 

साँस लेने में दिक्कत क्यों होती है?

साँस लेने में दिक्कत के कई कारण हो सकते हैं, जैसे अस्थमा, एलर्जी, फेफड़ों या हृदय की समस्या, मोटापा, तनाव, धूम्रपान या प्रदूषण।

हल्की साँस की तकलीफ़ में क्या करना चाहिए?

हल्की तकलीफ़ में भाप लेना, अदरक या हल्दी का सेवन, गहरी साँस लेने के अभ्यास और तुलसी का उपयोग लाभकारी हो सकता है।

कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

यदि सांस लेने में दिक्कत के साथ सीने में दर्द, चक्कर, नीले होंठ या नाखून, तेज़ साँस चलना या लगातार खांसी हो, तो तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।

क्या घरेलू उपचार हमेशा असर करते हैं?

हल्की समस्या में घरेलू उपाय राहत दे सकते हैं, लेकिन गंभीर स्थिति में ये पर्याप्त नहीं होते। समय पर मेडिकल जांच जरूरी है।

क्या तनाव से भी साँस लेने में दिक्कत हो सकती है?

हां, अत्यधिक तनाव या पैनिक अटैक के दौरान तेज़ या उथली साँस आ सकती है, जिसे प्राणायाम और ध्यान से नियंत्रित किया जा सकता है।

बच्चों में साँस लेने की दिक्कत के संकेत क्या हैं?

बच्चों में रोते समय या खेलते समय जल्दी साँस फूलना, सीटी जैसी आवाज़ और बार-बार खांसी मुख्य संकेत हैं।

क्या प्रदूषण साँस की समस्या बढ़ा सकता है?

हां, धूल, धुआँ और प्रदूषण फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकते हैं और सांस लेने में कठिनाई बढ़ा सकते हैं।

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