कब्ज का परमानेंट इलाज: कारण, इलाज और और सही खान-पान

Medically Reviewed By
Dr. Mayanka Lodha Seth
Written By Ankita Mishra
on Jan 9, 2026
Last Edit Made By Ankita Mishra
on Jan 12, 2026

आजकल की जीवनशैली में बाहर का खाना बहुत आम हो गया है। जंक फूड जैसे बर्गर, पैटीज़, फ्राइज आदि खाद्य पदार्थ रोज़ खाए जा रहे हैं। लेकिन यह कहावत हम सभी ने कभी न कभी ज़रूर सुनी है कि जो स्वाद के लिए अच्छे होते हैं, वे सेहत के लिए उतने ही नुकसानदायक होते हैं। ऐसे में अगर कब्ज़ की समस्या हो जाए, तो इसमें हैरानी की क्या बात है?
आइए जानते हैं कि कब्ज़ क्या है, कब्ज़ के कारण क्या होते हैं,कब्ज के लक्षण,कब्ज के karan, कब्ज़ का परमानेंट इलाज क्या है और कब्ज़ से बचने के लिए कौन-से फल खाने चाहिए। इन सभी प्रश्नों के उत्तर हम इस ब्लॉग के माध्यम से जानने की कोशिश करेंगे।
कब्ज़ क्या है? ( what is constipation in Hindi )
कब्ज़ एक सामान्य लेकिन परेशान करने वाली पाचन समस्या है, जिसमें व्यक्ति को मल त्याग (पेट साफ़) करने में कठिनाई होती है। इस स्थिति में मल सख़्त हो जाता है और पेट पूरी तरह साफ़ नहीं हो पाता। आमतौर पर अगर किसी व्यक्ति को सप्ताह में तीन बार से कम शौच होता है या शौच के दौरान ज़ोर लगाना पड़ता है, तो उसे कब्ज़ की समस्या मानी जाती है।
कब्ज के लक्षण ( symptoms of constipation )
कब्ज़ के लक्षण व्यक्ति विशेष में अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन सामान्यतः इसमें ये समस्याएँ शामिल होती हैं:
- पेट पूरी तरह साफ़ न होना
- मल का सख़्त, सूखा या गांठदार होना
- शौच के समय ज़ोर लगाना
- पेट में भारीपन या दर्द
- गैस, अपच और अफ़ारा
- भूख कम लगना
- चिड़चिड़ापन और थकान
- लंबे समय तक कब्ज़ रहने पर बवासीर या फिशर
कब्ज़ होने के मुख्य कारण
बदलती दिनचर्या, बढ़ता तनाव और गलत खाने की आदतें पाचन तंत्र को प्रभावित करती हैं, जिससे कब्ज़ की समस्या पैदा होती है। इसके प्रमुख कारण इस प्रकार हैं:
फाइबर की कमी
फाइबर हमारे पाचन तंत्र के लिए बेहद ज़रूरी होता है। यह मल में नमी बनाए रखता है और आंतों की गति को तेज़ करता है, जिससे पेट आसानी से साफ़ हो जाता है।
आजकल लोग फल, हरी सब्ज़ियाँ, सलाद और साबुत अनाज की बजाय ज़्यादा मात्रा में मैदा और प्रोसेस्ड फूड का सेवन करने लगे हैं। फाइबर की कमी से मल सख़्त और सूखा हो जाता है, जिससे शौच करने में कठिनाई होती है और कब्ज़ की समस्या बढ़ जाती है।
कम पानी पीना
पानी पाचन प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। पर्याप्त मात्रा में पानी न पीने पर शरीर आंतों से ज़्यादा पानी सोख लेता है, जिससे मल सख़्त हो जाता है।
जो लोग दिनभर बहुत कम पानी पीते हैं या केवल चाय-कॉफी पर निर्भर रहते हैं, उनमें कब्ज़ होने की संभावना अधिक होती है। पानी की कमी के कारण पेट साफ़ नहीं हो पाता और गैस व अपच की समस्या भी हो सकती है।
जंक फूड और तला-भुना भोजन
बर्गर, पिज़्ज़ा, फ्राइज़, समोसे और मैदे से बनी चीज़ें स्वाद में भले ही अच्छी लगती हों, लेकिन ये पाचन तंत्र को नुकसान पहुँचाती हैं।
इन खाद्य पदार्थों में फाइबर की मात्रा बहुत कम और वसा अधिक होती है, जिससे पाचन क्रिया धीमी हो जाती है। लगातार जंक फूड खाने से आंतें सुस्त हो जाती हैं और कब्ज़ की समस्या गंभीर रूप ले सकती है।
शारीरिक गतिविधि की कमी
शरीर को स्वस्थ रखने के लिए शारीरिक गतिविधि बेहद ज़रूरी है। लंबे समय तक बैठकर काम करना, चलना-फिरना कम करना और व्यायाम न करना पाचन तंत्र को कमजोर बना देता है।
नियमित चलने, योग या हल्के व्यायाम से आंतों की गति बेहतर होती है। शारीरिक गतिविधि की कमी से पाचन धीमा पड़ता है और कब्ज़ होने लगती है।
शौच की इच्छा को रोकना
अक्सर लोग व्यस्त दिनचर्या या सार्वजनिक स्थानों पर असहजता के कारण शौच की इच्छा को दबा लेते हैं। बार-बार ऐसा करने से आंतों की प्राकृतिक क्रिया प्रभावित होती है।
धीरे-धीरे शरीर को शौच का संकेत कम मिलने लगता है, जिससे मल सख़्त हो जाता है और कब्ज़ की समस्या उत्पन्न हो जाती है।
तनाव और मानसिक दबाव
मानसिक तनाव और चिंता का सीधा असर पाचन तंत्र पर पड़ता है। अत्यधिक तनाव के कारण आंतों की कार्यक्षमता कम हो जाती है और पाचन प्रक्रिया बाधित होती है।
जो लोग ज़्यादा तनाव में रहते हैं, उनमें कब्ज़, गैस और अपच जैसी समस्याएँ आम होती हैं। मानसिक शांति और पर्याप्त नींद पाचन स्वास्थ्य के लिए बेहद आवश्यक है।
कब्ज़ से बचने के लिए कौन-से फल खाने चाहिए?
फलों में मौजूद फाइबर, पानी और प्राकृतिक एंज़ाइम्स मल को नरम बनाते हैं और आंतों की गति को बेहतर करते हैं। नीचे ऐसे फल बताए गए हैं, जो कब्ज़ से राहत दिलाने में विशेष रूप से मददगार हैं:
पपीता
पपीता कब्ज़ के लिए सबसे असरदार फलों में से एक है। इसमें मौजूद पपेन एंज़ाइम पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है और मल को नरम करता है।
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सेब
सेब में पेक्टिन नामक घुलनशील फाइबर पाया जाता है, जो आंतों की सफ़ाई में मदद करता है।
नाशपाती
नाशपाती में फाइबर और पानी दोनों की मात्रा अधिक होती है। यह आंतों को सक्रिय रखती है और मल त्याग को आसान बनाती है।
अमरूद
अमरूद फाइबर से भरपूर फल है, जो पाचन को मज़बूत करता है।
संतरा और मौसमी
खट्टे फल जैसे संतरा और मौसमी में फाइबर के साथ-साथ विटामिन C भी होता है, जो पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है।
केला (पका हुआ)
पका हुआ केला पाचन के लिए फायदेमंद होता है और आंतों को आराम देता है।
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अंजीर
सूखा या ताज़ा अंजीर दोनों ही कब्ज़ में लाभकारी होते हैं।
कीवी
कीवी में प्राकृतिक एंज़ाइम और फाइबर होता है, जो मल त्याग को नियमित करता है।
कब्ज़ का परमानेंट इलाज
फाइबर युक्त आहार को जीवन का हिस्सा बनाएं
कब्ज़ से स्थायी छुटकारा पाने के लिए सबसे ज़रूरी है फाइबर।
क्या शामिल करें:
- फल: पपीता, सेब, नाशपाती, अमरूद, अंजीर
- सब्ज़ियाँ: पालक, लौकी, तोरी, गाजर
- अनाज: दलिया, ओट्स, जौ, साबुत गेहूं
- बीज: अलसी, चिया सीड्स
फाइबर मल को नरम करता है और आंतों को नियमित बनाता है।
पर्याप्त पानी पीने की आदत डालें
- पानी की कमी कब्ज़ को बढ़ा देती है।
- दिन में 8–10 गिलास पानी
- सुबह उठते ही गुनगुना पानी
- ज्यादा चाय-कॉफी से बचें
- पानी और फाइबर मिलकर पेट को प्राकृतिक रूप से साफ़ करते हैं।
रोज़ाना एक तय समय पर शौच जाएँ
- सुबह नाश्ते के बाद शौच जाना सबसे बेहतर
- शौच की इच्छा को कभी न रोकें
- ज़ोर न लगाएँ
- कुछ ही दिनों में शरीर की प्राकृतिक आदत बन जाती है।
नियमित व्यायाम और योग करें
- शारीरिक गतिविधि पाचन को तेज़ करती है।
- फायदेमंद योगासन:
- पवनमुक्तासन
- मालासन
- वज्रासन (भोजन के बाद)
- रोज़ 30 मिनट चलना भी पर्याप्त है।
जंक फूड और मैदा से दूरी बनाएं
- तला-भुना
- फास्ट फूड
- प्रोसेस्ड भोजन
- ये आंतों को सुस्त बना देते हैं और कब्ज़ को बार-बार लौटाते हैं।
तनाव और मानसिक दबाव कम करें
- पूरी नींद लें
- ध्यान और प्राणायाम करें
- मोबाइल स्क्रीन टाइम कम करें
- मानसिक शांति से पाचन तंत्र भी स्वस्थ रहता है।
घरेलू उपाय जो स्थायी राहत देते हैं
- रात में 2–3 अंजीर भिगोकर सुबह खाएं
- सुबह खाली पेट पपीता खाएं
- कभी-कभी इसबगोल दूध के साथ
- त्रिफला चूर्ण (डॉक्टर की सलाह से)
दवाइयों पर निर्भर न रहें
- रोज़ाना रेचक दवाइयाँ न लें
- ये आंतों को कमजोर बना सकती हैं
FAQ
1. कब्ज़ क्या है?
कब्ज़ एक पाचन समस्या है, जिसमें पेट ठीक से साफ़ नहीं होता, मल सख़्त हो जाता है और शौच करने में परेशानी होती है।
2. क्या कब्ज़ का परमानेंट इलाज संभव है?
हाँ, जीवनशैली और खानपान में सही बदलाव करके कब्ज़ से स्थायी राहत पाई जा सकती है। केवल दवाइयों से परमानेंट इलाज संभव नहीं होता।
3. कब्ज़ का सबसे बड़ा कारण क्या है?
कब्ज़ का सबसे बड़ा कारण फाइबर की कमी, कम पानी पीना और गलत जीवनशैली है।
4. कब्ज़ के लिए सबसे अच्छा भोजन कौन-सा है?
- फाइबर युक्त भोजन जैसे:
- पपीता, सेब, अमरूद
- हरी सब्ज़ियाँ
- दलिया, ओट्स, साबुत अनाज
- अलसी और चिया सीड्स
5. कब्ज़ में कौन-से फल खाने चाहिए?
पपीता, सेब (छिलके सहित), नाशपाती, अमरूद, अंजीर और कीवी कब्ज़ में बहुत लाभकारी होते हैं।
6. क्या रोज़ाना दवा लेना सही है?
नहीं। रोज़ाना रेचक (laxative) दवाइयाँ लेने से आंतें कमजोर हो सकती हैं। इन्हें केवल डॉक्टर की सलाह से ही लेना चाहिए।
7. क्या पानी पीने से कब्ज़ ठीक होती है?
हाँ। पर्याप्त पानी फाइबर के साथ मिलकर मल को नरम करता है और पेट साफ़ रखने में मदद करता है।
8. कब्ज़ में कौन-से योगासन फायदेमंद हैं?
- पवनमुक्तासन
- मालासन
- वज्रासन
- भुजंगासन
9. क्या तनाव से भी कब्ज़ होती है?
हाँ। अत्यधिक तनाव और चिंता पाचन तंत्र को प्रभावित करती है, जिससे कब्ज़, गैस और अपच की समस्या हो सकती है।
10. कब्ज़ में क्या नहीं खाना चाहिए?
- जंक फूड
- मैदा
- ज़्यादा तला-भुना
- ज़्यादा चाय-कॉफी
11. कब्ज़ में डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?
- कब्ज़ 2–3 हफ्तों से ज्यादा बनी रहे
- मल में खून आए
- तेज़ पेट दर्द या वजन कम हो
12. कब्ज़ से बचने का सबसे आसान तरीका क्या है?
- रोज़ाना:
- फाइबर युक्त आहार
- पर्याप्त पानी
- नियमित शौच की आदत
- हल्का व्यायाम


